शत्रुनाशक श्री हनूमत् पञ्च चामरम् | Hanumat Panch Chamaram
शत्रुनाशक श्री हनूमत् पञ्च चामरम् एक अद्भुत स्तोत्र है जो भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने और सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हेतु अत्यंत प्रभावी माना गया है।
🌺 श्री हनूमत् पञ्चचामरम्
Shri Hanumat Panch Chamaram
श्लोक १
नमोऽस्तु ते हनूमते दयावते मनोगते
सुवर्णपर्वताकृते नभस्स्वतः सुताय ते ।
न चाञ्जनेय ते समो जगत्त्रये महामते
पराक्रमे वचःकमे समस्तसिद्धिसङ्क्रमे ॥ १॥
हिन्दी अर्थ:
हे दयालु हनुमानजी! आपको नमस्कार है। आप स्वर्ण पर्वत के समान विशाल, वायु के पुत्र और मन के समान तीव्र हैं। हे अञ्जनेय! इस त्रिभुवन में आपके समान बुद्धिमान, पराक्रमी और सिद्धियों से सम्पन्न कोई नहीं है।
English Translation:
Salutations to you, O compassionate Hanuman! You are mighty as a golden mountain, swift as the wind, son of Vayu. O Anjaneya, none in all the three worlds equals you in wisdom, valor, or perfection.
श्लोक २
रविं ग्रसिष्णुरुत्पतन् फलेच्छया शिशुर्भवान्
रवेर्गृहीतवानहो समस्तवेदशास्त्र्कम् ।
भवन्मनोज्ञभाषणं बभूव कर्णभूषणं
रघूत्तमस्य मानसाम्बुजस्य पूर्णतोषणम् ॥ २॥
हिन्दी अर्थ:
बाल्यावस्था में आप सूर्य को फल समझकर पकड़ने चले गए और उसी से समस्त वेद-शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। आपकी मधुर वाणी श्रीरामजी के हृदय कमल के लिए आनंद का स्रोत बन गई।
English Translation:
As a child, you leapt toward the Sun thinking it a fruit, and thereby gained mastery over all Vedas and scriptures. Your sweet speech became the ornament to Rama’s ears and the delight of His heart.
श्लोक ३
धरात्मजापतिं भवान् विभावयन् जगत्पतिं
जगाम रामदासतां समस्तलोकविश्रुताम् ।
विलङ्घ्य वारिधिं जवात् विलोक्य दीनजानकीं
दशाननस्य मानसं ददाह लङ्कया समम् ॥ ३॥
हिन्दी अर्थ:
आपने राम को परमेश्वर जानकर उनके भक्त की श्रेष्ठ अवस्था धारण की। समुद्र को लाँघकर आपने सीता माता को देखा और लंका को जलाकर रावण के अभिमान का नाश कर दिया।
English Translation:
Recognizing Rama as the Supreme Lord, you became His devoted servant. Crossing the vast ocean, you found Sita in distress and burned Lanka, destroying Ravana’s pride.
श्लोक ४
विलोक्य मातरं कृशां दशाननस्य तद्वने
भवानभाषत प्रियं मनोहरं च संस्कृतम् ।
समस्तदुष्टरक्षसां विनाशकालसूचनं
चकार रावणाग्रतः नयेन वा भयेन वा ॥ ४॥
हिन्दी अर्थ:
जब आपने रावण के वन में कृशकाय सीता माता को देखा, तब आपने उन्हें मधुर संस्कृत में प्रिय वचन कहे और राक्षसों के विनाश का संकेत रावण के सामने ही दे दिया।
English Translation:
Beholding the frail Sita in Ravana’s grove, you spoke sweet words in pure Sanskrit and signaled before Ravana himself the impending doom of all demons.
श्लोक ५
महाबलो महाचलं समुह्य चौषधिप्रभं
भवान् ररक्ष लक्ष्मणं भयावहे महावहे ।
महोपकारिणं तदा भवन्तमात्मबान्धवं
समस्तलोकबान्धवोऽप्यमन्यत स्वयं विभुः ॥ ५॥
हिन्दी अर्थ:
जब लक्ष्मण मूर्छित हुए, तब आपने पर्वत सहित औषधियाँ उठाकर उन्हें जीवित किया। उस समय श्रीराम ने आपको अपना आत्मीय और समस्त जगत का बन्धु माना।
English Translation:
When Lakshmana fell unconscious, you carried the mountain of herbs and revived him. Then Rama Himself declared you not only His own kin but the friend of the whole universe.
श्लोक ६
भवांश्च यत्र यत्र तत् शृणोति रामकीर्तनं
करोति तत्र तत्र भोः सभाष्पमस्तकाञ्जलिम् ।
प्रदेहि मेऽञ्जनासुत त्वदीयभक्तिवैभवं
विदेहि मे निरञ्जनं च रामदासदासताम् ॥ ६॥
हिन्दी अर्थ:
जहाँ कहीं भी रामकथा होती है, वहाँ आप अश्रुपूर्ण नेत्रों से folded hands के साथ उपस्थित रहते हैं। हे अञ्जनासुत! मुझे अपनी अटूट भक्ति और रामदास की सेवा का अवसर प्रदान करें।
English Translation:
Wherever Rama’s glories are sung, there you appear, eyes filled with tears, hands folded in devotion. O son of Anjana, grant me steadfast devotion and the bliss of serving Rama’s servants.
श्लोक ७
अगण्यपुण्यवान् भवान् अनन्यधन्यजीवनः
विमुच्य मौक्तिकस्रजं ददौ धरात्मजा मुदा ।
भवन्तमालिलिङ्ग यद् रघूत्तमः स्वयं वदन्
इदं हि मे हनूमतः प्रदेयसर्वमित्यहो ॥ ७॥
हिन्दी अर्थ:
हे अगणित पुण्य वाले हनुमानजी! जब सीता जी ने आपको मोती की माला दी, तब आपने उसे छोड़कर राम का नाम ही स्वीकार किया, जिससे श्रीराम ने प्रसन्न होकर कहा—“हनुमान को मैं सब कुछ अर्पित करता हूँ।”
English Translation:
O most meritorious Hanuman! When Sita joyfully offered you a pearl garland, you cast it aside, treasuring only Rama’s name. Delighted, Rama proclaimed, “All that I have belongs to Hanuman.”
श्लोक ८
विदेहराजनन्दिनीमनोहरे वरे परे
विदेहमुक्तिदायके विधेहि मे मनो हरे ।
क्षणं क्षणं निरीक्षणं भवेद् यथा मयि प्रभोः
तथा निवेदयस्व मद्दशां दशाननान्तके ॥ ८॥
हिन्दी अर्थ:
हे रावण-विनाशक हनुमान! आप विदेहराज की पुत्री सीता के प्रिय और विदेह मुक्ति देने वाले हैं। कृपया मेरे मन को श्रीराम में स्थिर करें और उन्हें मेरी दशा निवेदित करें।
English Translation:
O destroyer of Ravana, beloved of Sita and bestower of liberation! May my heart ever dwell on Rama—please convey my humble state to the Lord at every moment.
श्लोक ९
इदं च पञ्चचामरं गृहाण दासकल्पितं
समीरणात्मसम्भव प्रमोदमानचेतसा ।
रिपून् षडान्तरान् विनाशयाशु दुर्दमान्
पुनर्भवाख्यकर्दमात् विमुच्य पाहि पाहि माम् ॥ ९॥
हिन्दी अर्थ:
हे वायुपुत्र! यह पाँच चामरों से सुसज्जित स्तोत्र मैं दासभाव से आपको अर्पित करता हूँ। कृपया मेरे आंतरिक शत्रु — काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मात्सर्य — का विनाश करें और जन्म-मरण के कीचड़ से मुझे मुक्त करें।
English Translation:
O son of the Wind, accept this fivefold “Chamaram” stotra offered by your humble servant. Destroy the six inner enemies—lust, anger, greed, delusion, pride, and envy—and free me from the mire of rebirth.
समाप्ति श्लोक
इति श्रीहनूमत् पञ्चचामरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
हिन्दी अर्थ:
इस प्रकार श्री हनुमानजी का पवित्र पंच चामर स्तोत्र सम्पूर्ण होता है।
English Translation:
Thus ends the sacred Hanumat Panch Chamaram Stotra.
FAQs
प्रश्न 1: हनुमत् पञ्च चामरम् क्या है?
उत्तर: यह पवित्र स्तोत्र भगवान हनुमान को समर्पित है जो शत्रु विनाश और आत्मबल वृद्धि के लिए पाठ किया जाता है।
प्रश्न 2: इस स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
उत्तर: मंगलवार या शनिवार के दिन, प्रातः या सायंकाल हनुमान मंदिर में इस स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
प्रश्न 3: पञ्च चामरम् के पाठ से क्या लाभ होता है?
उत्तर: यह स्तोत्र भय, रोग, दोष और शत्रु बाधा से रक्षा करता है तथा आत्मबल, वीरता और सफलता प्रदान करता है।
