श्री शाकंभरी अष्टकम् | 51 शक्ति पीठ | शाकंभरी नवरात्रि स्तोत्र
माता शाकंभरी को अन्नपूर्णा स्वरूप माना गया है। शाकंभरी नवरात्रि में पाठ किया जाने वाला श्री शाकंभरी अष्टकम् देवी की विशेष कृपा प्रदान करता है। यह स्तोत्र 51 शक्ति पीठों की ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है और भक्तों को अभाव, रोग व भय से मुक्त करता है।
🙏 श्री शाकंभर्यष्टकम् – श्लोकानुसार हिंदी व English अर्थ 🌺 (आदि शंकराचार्य विरचित)
🔱 श्लोक 1
श्लोक
शक्तिः शांभवविश्व रूपमहिमा मांगल्यमुक्तामणि ।
घंटा शूलमसिं लिपिं च दधतीं दक्षैश्चतुर्भिः करैः ॥
वामैर्बाहुभिरर्घ्यशेषभरितं पात्रं च शीर्षं तथा ।
चक्रं खेटकमंधकारिदयिता त्रैलोक्यमाता शिवा ॥
🪔 हिंदी अर्थ
माता शाकंभरी शिव-शक्ति स्वरूपा हैं, जिनकी महिमा संपूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। वे मंगलमय मोती के समान हैं। उनके दाहिने चार हाथों में घंटा, त्रिशूल, तलवार और लेखनी है। बाएँ हाथों में अर्घ्य पात्र, कटा हुआ मस्तक, चक्र और ढाल धारण करती हैं। वे अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाली, तीनों लोकों की माता और शिवा स्वरूपा हैं।
🌍 English Meaning
Mother Shakambhari is the supreme Shakti of Lord Shiva, whose glory pervades the entire universe. She is auspicious like a pearl. In her right hands she holds a bell, trident, sword, and script; in her left hands she holds a vessel of offering, a severed head, a discus, and a shield. She destroys the darkness of ignorance and is the Divine Mother of the three worlds.
🔱 श्लोक 2
श्लोक
देवी दिव्यसरोजपादयुगुले मंजुक्कणन्नुपुरा ।
सिंहारूढकलेवरा भगवती व्याघ्रांबरावेष्टिता ॥
वैडूर्यादि महार्घरत्नविलसन्नक्षत्रमालोज्ज्वला ।
वाग्देवी विषमेक्षणा शशिमुखी त्रैलोक्यमाता शिवा ॥
🪔 हिंदी अर्थ
देवी के चरण कमलों में मधुर नूपुर झंकार करती है। वे सिंह पर आरूढ़ हैं, व्याघ्रचर्म धारण किए हुए हैं। बहुमूल्य रत्नों और नक्षत्रमाला से सुशोभित हैं। वे वाणी की अधिष्ठात्री, दिव्य दृष्टि वाली, चंद्रमा समान मुख वाली, तीनों लोकों की माता हैं।
🌍 English Meaning
The Goddess has lotus-like feet adorned with melodious anklets. She rides a lion and is clad in tiger skin. She shines with precious gems and a garland of stars. She is the Goddess of speech, possesses divine vision, has a moon-like face, and is the Mother of the three worlds.
🔱 श्लोक 3
श्लोक
ब्रह्माणी च कपालिनी सुयुवती रौद्री त्रिशूलान्विता ।
नाना दैत्यनिबर्हिणी नृशरणा शंखासिखेटायुधा ॥
भेरी शंख मृदंग घोषमुदिता शूलिप्रिया चेश्वरी ।
माणिक्याढ्य किरीटकांतवदना त्रैलोक्यमाता शिवा ॥
🪔 हिंदी अर्थ
माता ब्रह्माणी, कपालधारिणी, रौद्र रूप वाली हैं। वे अनेक दैत्यों का संहार करने वाली, शरणागतों की रक्षक हैं। शंख, तलवार, ढाल आदि आयुध धारण करती हैं। युद्ध वाद्यों के नाद से प्रसन्न होती हैं और रत्नजटित मुकुट से शोभित हैं।
🌍 English Meaning
She manifests as Brahmani and Kapalini, fierce and youthful, wielding the trident. She destroys demons and protects devotees. Holding conch, sword, and shield, she rejoices in sacred battle sounds and shines with a jewel-studded crown.
🔱 श्लोक 4
श्लोक
वंदे देवी भवार्तिभंजनकरी भक्तप्रिया मोहिनी ।
मायामोहमदान्धकारशमनी मत्प्राणसंजीवनी ॥
यंत्रं मंत्रं जपौ तपो भगवती माता पिता भ्रातृका ।
विद्या बुद्धिधृती गतिश्च सकल त्रैलोक्यमाता शिवा ॥
🪔 हिंदी अर्थ
मैं उस देवी को नमन करता हूँ जो संसार के कष्टों को हरने वाली, भक्तों की प्रिय और मोहिनी हैं। वे माया और अज्ञान का नाश करने वाली, मेरे प्राणों की जीवनदायिनी हैं। वही यंत्र, मंत्र, जप, तप, माता-पिता, विद्या, बुद्धि और गति हैं।
🌍 English Meaning
I bow to the Goddess who removes worldly suffering, enchants devotees, destroys illusion and ignorance, and is the life-force itself. She is mantra, yantra, penance, mother, father, knowledge, intellect, and ultimate refuge.
🔱 श्लोक 5
श्लोक
श्रीमातस्त्रिपुरे त्वमलयलया स्वर्गादिलोकांतरे ।
पाताले जलवाहिनी त्रिपथगा लोकत्रये शंकरी ॥
त्वं चाराधकभाग्यसंपदविनी श्रीमूर्ध्नि लिंगांकिता ।
त्वां वंदे भवभीतिभंजनकरीं त्रैलोक्यमातः शिवे ॥
🪔 हिंदी अर्थ
हे श्रीमाता! आप त्रिपुर सुंदरी हैं, स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में व्याप्त हैं। तीनों लोकों में बहने वाली पवित्र धारा स्वरूपा हैं। आप भक्तों को सौभाग्य प्रदान करती हैं और शिवलिंग से अभिन्न हैं।
🌍 English Meaning
O Divine Mother, you exist as Tripura in heaven, earth, and netherworlds. You flow as sacred energy through all realms. You bestow fortune upon devotees and are eternally united with Shiva.
🔱 श्लोक 6
श्लोक
श्रीदुर्गे भगिनीं त्रिलोकजननीं कल्पांतरे डाकिनीं ।
वीणापुस्तकधारिणीं गुणमणिं कस्तूरिकालेपनीं ॥
नानारत्नविभूषणां त्रिनयनां दिव्यांबरावेष्टितां ।
वंदे त्वां भवभीतिभंजनकरीं त्रैलोक्यमातः शिवे ॥
🪔 हिंदी अर्थ
माता दुर्गा स्वरूपा, तीनों लोकों की जननी हैं। वे वीणा और पुस्तक धारण करती हैं, त्रिनेत्री हैं, दिव्य वस्त्र और रत्नाभूषणों से सुशोभित हैं तथा संसार के भय को दूर करती हैं।
🌍 English Meaning
She appears as Durga, the Mother of the three worlds, holding veena and scriptures. Three-eyed and adorned with divine garments and jewels, she removes all fears of existence.
🔱 श्लोक 7
श्लोक
नैर्ऋत्यां दिशि पत्रतीर्थममलं मूर्तित्रये वासिनी ।
सांमुख्या च हरिद्रतीर्थमनघं वाप्यां च तैलोदकं ॥
गंगादित्रयसंगमे सकुतुकं पीतोदके पावने ।
त्वां वंदे भवभीतिभंजनकरीं त्रैलोक्यमातः शिवे ॥
🪔 हिंदी अर्थ
माता विभिन्न तीर्थों में, त्रिमूर्ति स्वरूप में निवास करती हैं। गंगा आदि पवित्र संगमों में उनकी उपस्थिति से सभी जल पवित्र हो जाते हैं।
🌍 English Meaning
The Goddess resides in sacred directions and holy waters, manifesting as the Trinity. Her presence sanctifies all holy rivers and sacred confluences.
🔱 श्लोक 8
श्लोक
द्वारे तिष्ठति वक्रतुंडगणपः क्षेत्रस्य पालस्ततः ।
शक्रेड्या च सरस्वती वहति सा भक्तिप्रिया वाहिनी ॥
मध्ये श्रीतिलकाभिधं तव वनं शाकम्भरी चिन्मयी ।
त्वां वंदे भवभीतिभंजनकरीं त्रैलोक्यमातः शिवे ॥
🪔 हिंदी अर्थ
माता के द्वार पर गणपति रक्षक हैं, इंद्र द्वारा पूजित सरस्वती उनकी सेवा में हैं। शाकंभरी का वन दिव्य चेतना से परिपूर्ण है।
🌍 English Meaning
Lord Ganesha guards her abode, Saraswati serves her devotionally, and her sacred forest Shakambhari radiates pure divine consciousness.
🔱 फलश्रुति (श्लोक 9)
श्लोक
शाकंभर्यष्टकमिदं यः पठेत्प्रयतः पुमान् ।
स सर्वपापविनिर्मुक्तः सायुज्यं पदमाप्नुयात् ॥
🪔 हिंदी अर्थ
जो श्रद्धा से इस शाकंभरी अष्टकम् का पाठ करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होता है।
🌍 English Meaning
Whoever recites this Shakambhari Ashtakam with devotion is freed from all sins and attains liberation.
लाभ (Benefits / Labh)
🌾 अन्न संकट और आर्थिक अभाव से मुक्ति
🌾 रोग, दुर्भिक्ष और महामारी में रक्षा
🌾 घर में सुख-समृद्धि और संतुलन
🌾 मातृ शक्ति की विशेष कृपा
🌾 शाकंभरी नवरात्रि में शीघ्र फलदायी
FAQ (SEO Friendly)
❓ श्री शाकंभरी अष्टकम् क्या है?
यह माता शाकंभरी देवी की स्तुति में रचित आठ श्लोकों का दिव्य स्तोत्र है।
❓ शाकंभरी नवरात्रि कब मनाई जाती है?
यह नवरात्रि पौष मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है।
❓ क्या यह स्तोत्र 51 शक्ति पीठों से जुड़ा है?
जी हाँ, माता शाकंभरी को सभी शक्ति पीठों की संयुक्त ऊर्जा का स्वरूप माना जाता है।
❓ इस अष्टकम् का पाठ कब करें?
प्रातः या संध्या समय, विशेषकर नवरात्रि और शुक्रवार को पाठ श्रेष्ठ माना गया है।
❓ क्या इससे अन्न व धन संकट दूर होते हैं?
श्रद्धापूर्वक पाठ करने से अन्न, धन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है।
