श्री रेणुका यल्लम्मा स्तोत्र | मातृशक्ति | Shri Renuka Yallamma Stotram | माघ पूर्णिमा विशेष

माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री रेणुका यल्लम्मा स्तोत्र का पाठ मातृशक्ति की कृपा, रोग-निवारण, भय-शांति और जीवन में संरक्षण प्रदान करता है। संपूर्ण स्तोत्र अर्थ सहित पढ़ें।

श्री रेणुका स्तोत्र

 

श्रीगणेशाय नमः ।

शिवां शान्तरूपां मनोवागतीतां 

निजानन्दपूर्णां सदाऽद्वैतरूपाम् ।

परां वेदगम्यां परब्रह्मरूपां 

भजे रेणुकां सर्वलौकैकवेद्याम्  ॥ १॥

सदाचारसद्भक्तिबोधादिभिर्या

गुरोरङ्घ्रिशुश्रूषयां मुख्यवृत्त्या ।

सुवेद्या सुलभ्या परानन्दपूर्णा 

भजे रेणुकां तां विमोहप्रशान्त्यै ॥ २॥

श्रुतिर्नेतिनेतीति सर्वं निरस्य 

वदत्येकमाद्यं विभुं चित्सुखं यत् ।

तदेवावशिष्टं स्वरूपं विशुद्धं 

भजे रेणुकां तां सदा मृत्युहीनाम् ॥ ३॥

यदानन्दसिन्धौ निमग्नो न पश्येद्-

अहो कर्मजालं फलं वा तदीयम् ।

न जैवं न शैवं जगन्नैव मायां 

चिदेकस्वरूपां भजे रेणुकां ताम् ॥ ४॥

अनेकान्तिकां सर्वभेदातिरूपां 

तमोऽज्ञानदुःखातिगां शुद्धरूपाम् ।

सदाऽध्यात्मविद्याप्रदानैकशीलं 

भजे रेणुकां मुक्तिसौख्याधिदेवीम् ॥ ५॥

त्रितापप्रशन्त्यै समाराध्यमानां 

सदा जीवलोके स्वसौख्यप्रदात्रीम् ।

भवोम्बोधिसेतुं चिदानन्दकन्दां 

भजे रेणुकां ज्ञानमुद्रैकलक्ष्याम् ॥ ६॥

सदा भक्तहृत्कौमुदीं भद्रभद्रां 

सदोङ्कारवाच्यां वरेण्यां शरण्याम् ।

स्वभक्तार्तिनाशां शुभाङ्गां गुणाढ्यां 

भजे रेणुकां भक्तसौख्याब्धिरूपाम् ॥ ७॥

सदा भक्तवात्सल्यपूर्णां सुरम्यां 

सुरेन्द्रादिभिः स्तूयमानां सुषूक्तैः ।

सदा भक्तवृन्दैश्च संसेव्यमानां 

भजे रेणुकां भक्तभाग्यां भवानीम् ॥ ८॥

पठेद्यः सदा भक्तियुतो विशुद्धः 

स्ववर्णाश्रमाचारतो नित्ययुक्तः ।

स मुक्तः कृती रेणुकायाः प्रसादात्

सदा राजते राजते लोकपूज्या ॥ ९॥

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यसद्गुरुभगवता श्रीधरस्वामिना

विरचितं श्रीरेणुकास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ 

❓ FAQs (Frequently Asked Questions)

1. श्री रेणुका यल्लम्मा कौन हैं?

श्री रेणुका यल्लम्मा मातृशक्ति का स्वरूप हैं, जिन्हें दक्षिण भारत में करुणा, संरक्षण और शक्ति की देवी माना जाता है।

2. माघ पूर्णिमा पर इस स्तोत्र का क्या महत्व है?

माघ पूर्णिमा देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। इस दिन किया गया स्तोत्र पाठ शीघ्र फल प्रदान करता है।

3. श्री रेणुका यल्लम्मा स्तोत्र का पाठ कब करें?

प्रातः स्नान के बाद या पूर्णिमा की संध्या में दीप प्रज्वलित कर पाठ करना उत्तम माना जाता है।

4. क्या इस स्तोत्र से रोग शांति होती है?

हाँ, भक्तिपूर्वक किया गया पाठ मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रोगों में शांति प्रदान करता है।

5. क्या महिलाएँ और गृहस्थ इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं?

जी हाँ, यह स्तोत्र सभी के लिए है—विशेषकर मातृशक्ति की कृपा चाहने वाले भक्तों के लिए।