श्री लक्ष्मी आवाहन द्वादश नाम स्तोत्रम् | Shri Lakshmi Dwadasha Nama Stotram | धन-समृद्धि हेतु प्रभावी स्तोत्र

श्री लक्ष्मी आवाहन द्वादश नाम स्तोत्रम् देवी महालक्ष्मी के 12 पावन नामों का संग्रह है। इसके पाठ से धन की वृद्धि, सौभाग्य, शांति और स्थिरता प्राप्त होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से दीपावली, शुक्रवार और पूर्णिमा के दिन पढ़ा जाता है।

 

🌸 श्री लक्ष्मी द्वादश नाम स्तोत्रम् — श्लोक सहित हिन्दी अर्थ


१. श्रीदेवी प्रथमं नाम द्वितीयं अमृत्तोद्भवा।

अर्थ:

पहला नाम श्रीदेवी है और दूसरा नाम अमृत से उत्पन्न होने वाली देवी (अमृतोत्पन्ना) है।


२. तृतीयं कमला प्रोक्ता चतुर्थं लोकसुन्दरी ॥

अर्थ:

तीसरा नाम कमला (कमल पर विराजमान देवी) है और चौथा नाम लोकसुन्दरी (तीनों लोकों की सुन्दरी) है।


३. पञ्चमं विष्णुपत्नी च षष्ठं स्यात् वैष्णवी तथा।

अर्थ:

पाँचवाँ नाम विष्णुपत्नी (भगवान विष्णु की पत्नी) है और छठा नाम वैष्णवी (विष्णु की शक्ति) है।


४. सप्ततं तु वरारोहा अष्टमं हरिवल्लभा ॥

अर्थ:

सातवाँ नाम वरारोहा (उच्च स्थान पर विराजमान) है और आठवाँ नाम हरिवल्लभा (भगवान हरि की प्रिय) है।


५. नवमं शार्गिंणी प्रोक्ता दशमं देवदेविका।

अर्थ:

नौवाँ नाम शार्गिणी (शारंगधनुषधारी विष्णु की अधिष्ठात्री शक्ति) है और दसवाँ नाम देवदेविका (सभी देवियों की देवी) है।


६. एकादशं तु लक्ष्मीः स्यात् द्वादशं श्रीहरिप्रिया ॥

अर्थ:

ग्यारहवाँ नाम लक्ष्मी है और बारहवाँ नाम श्रीहरिप्रिया (भगवान हरि की अति प्रिय) है।


७. द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः।

अर्थ:

जो व्यक्ति इन बारह नामों का प्रातः, दोपहर और संध्या (तीन संधियों) में पाठ करता है—


८. आयुरारोग्यमैश्वर्यं तस्य पुण्यफलप्रदम् ॥

अर्थ:

उसे दीर्घायु, आरोग्य (स्वास्थ्य), धन-संपत्ति और पुण्यफल प्राप्त होते हैं।


९. द्विमासं सर्वकार्याणि षण्मासाद्राज्यमेव च।

अर्थ:

दो महीने तक नियमित पाठ से सभी कार्य सिद्ध होते हैं,
और छह महीनों तक पाठ करने से राज्य के समान प्रतिष्ठा और सफलता प्राप्त होती है।


१०. संवत्सरं तु पूजायाः श्रीलक्ष्म्याः पूज्य एव च ॥

अर्थ:

यदि पूरे साल तक विधि-विधान से लक्ष्मीजी की पूजा और इस स्तोत्र का पाठ किया जाए,
तो देवी लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं।


॥ इति श्रीलक्ष्मी द्वादशनामस्तोत्रं  ॥


🌺 अतिरिक्त श्लोक


**0१. श्रीः पद्मा कमला मुकुन्दमहिषी लक्ष्मी त्रिलोकेश्वरी

मा क्षीराब्धिसुता विरिञ्चिजननी विद्या सरोजासना ।**

अर्थ:

श्री, पद्मा, कमला, मुकुंद (विष्णु) की पत्नी, लक्ष्मी, तीनों लोकों की अधिष्ठात्री,
क्षीरसागर मंथन से उत्पन्न, ब्रह्मा की माता (ऊर्जा), विद्या और कमल पर विराजमान—
ये सभी माताएं रूप में लक्ष्मी जी की स्तुतियाँ हैं।


0२. सर्वाभीष्टफलप्रदेति सततं नामानि ये द्वादश

प्रातः शुद्धतराः पठन्त्यभिमतान् सर्वान् लभन्ते शुभान् ॥ ४॥**

अर्थ:

जो भक्त हर सुबह शुद्ध भाव से लक्ष्मी जी के इन बारह नामों का जप करते हैं,
उन्हें सभी मनोकामनाएँ और शुभ फल प्राप्त होते हैं।


0३. भद्रलक्ष्मीस्तवं नित्यं पुण्यमेतच्छुभावहम् ।

काले स्नात्वाऽपि कावेर्यां जप श्रीवृक्षसन्निदौ ॥**

अर्थ:

भद्रलक्ष्मी स्तव का दैनिक पाठ अत्यंत शुभ माना गया है।
कावेरी नदी में स्नान के बाद या किसी पवित्र वृक्ष के पास बैठकर इस स्तोत्र का जप करने से महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।


🌼 समापन

॥ इति श्रीलक्ष्मी द्वादशनामस्तोत्रं अथवा श्रीभद्रलक्ष्मीस्तवं संपूर्णम् ॥

लाभ (Benefits)

श्री लक्ष्मी आवाहन द्वादश नाम स्तोत्र के लाभ:

  • धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति

  • आर्थिक संकट दूर होते हैं

  • घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

  • व्यवसाय में प्रगति और स्थिरता

  • सौभाग्य एवं शुभता का वास

  • माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त

  • मानसिक शांति और प्रसन्नता

FAQ (Frequently Asked Questions)

1. श्री लक्ष्मी द्वादश नाम स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

शुक्रवार, पूर्णिमा, दीपावली, और विशेष लक्ष्मी पूजा के समय पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।

2. इस स्तोत्र का कितनी बार पाठ करना चाहिए?

दिन में 1 या 3 बार पाठ करने से अद्भुत लाभ मिलते हैं।

3. क्या इस स्तोत्र को घर में कोई भी पढ़ सकता है?

हाँ, इसे महिलाएँ–पुरुष सभी पढ़ सकते हैं। विशेष नियम नहीं हैं।

4. क्या धन-संबंधी समस्याओं में यह स्तोत्र कारगर है?

हाँ, यह स्तोत्र धन वृद्धि और समृद्धि देने वाला माना गया है।

5. इस स्तोत्र के साथ कौन-सी पूजा करना शुभ है?

दीपक, फूल, और चावल के साथ माँ लक्ष्मी का ध्यान करते हुए पढ़ना अत्यंत प्रभावी है।