श्री गरुड कवचम् | Shri Garuda Kavacham with Lyrics & Meaning in Hindi | Powerful Protection Stotra
गरुड कवचम् एक पवित्र स्तोत्र है जो भगवान विष्णु के वाहन श्री गरुड जी को समर्पित है। इसका पाठ विष, भय, और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है। नियमित पाठ से व्यक्ति सभी पापों और बन्धनों से मुक्त होकर बल, तेज और साहस प्राप्त करता है।
🌿 श्री गरुड कवचम्
(Sri Garuda Kavacham)
ऋषिः — नारद भगवान्
देवता — वैनतेय (गरुड़ जी)
छन्दः — अनुष्टुप्
विनियोगः — श्री वैनतेय (गरुड़ जी) की प्रसन्नता के लिए जप
🕉️ श्लोक १
ॐ शिरो मे गरुडः पातु ललाटे विनितासुतः ।
नेत्रे तु सर्पहा पातु कर्णौ पातु सुराहतः ॥ १॥
भावार्थ:
मेरे सिर की रक्षा गरुड़ जी करें, और ललाट की रक्षा विनता के पुत्र करें।
मेरी आँखों की रक्षा सर्पों के शत्रु गरुड़ करें, तथा मेरे कानों की रक्षा देवताओं को पराजित करने वाले करें।
🕉️ श्लोक २
नासिकां पातु सर्पारिः वदनं विष्णुवाहनः ।
सूर्येतालू च कण्ठे च भुजौ पातु महाबलः ॥ २॥
भावार्थ:
मेरी नासिका की रक्षा सर्पों के शत्रु गरुड़ करें, मुख की रक्षा भगवान विष्णु के वाहन करें,
तालु (ऊपरी मुँह का भाग) और कंठ की रक्षा सूर्य के समान तेजस्वी तथा बलशाली गरुड़ करें।
🕉️ श्लोक ३
हस्तौ खगेश्वरः पातु कराग्रे तरुणाकृतिः ॥ ३॥
भावार्थ:
मेरे दोनों हाथों की रक्षा पक्षियों के स्वामी गरुड़ करें, और हाथों के अग्र भाग (अंगुलियों) की रक्षा नवयुवक के समान तेजस्वी गरुड़ करें।
🕉️ श्लोक ४
स्तनौ मे विहगः पातु हृदयं पातु सर्पहा ।
नाभिं पातु महातेजाः कटिं मे पातु वायुनः ॥ ४॥
भावार्थ:
मेरे स्तनों (वक्षस्थल) की रक्षा विहंग (गरुड़) करें, हृदय की रक्षा सर्पों के शत्रु करें।
नाभि की रक्षा महान तेज वाले गरुड़ करें, और कटि (कमर) की रक्षा वायु के समान गति वाले गरुड़ करें।
🕉️ श्लोक ५
ऊरू मे पातु उरगिरिः गुल्फौ विष्णुरथः सदा ।
पादौ मे तक्षकः सिद्धः पातु पादाङ्गुलींस्तथा ॥ ५॥
भावार्थ:
मेरी जाँघों की रक्षा सर्पों के शत्रु करें, गुल्फों (टखनों) की रक्षा विष्णु के वाहन गरुड़ करें।
मेरे पैरों और पैर की अंगुलियों की रक्षा तक्षक पर विजय पाने वाले गरुड़ सदैव करें।
🕉️ श्लोक ६
रोमकूपानि मे वीरो त्वचं पातु भयापहा ।
इत्येवं कवचं दिव्यं पापघ्नं सर्वकामदम् ॥ ६॥
भावार्थ:
मेरे शरीर के रोमकूपों की रक्षा वीर गरुड़ करें, और मेरी त्वचा की रक्षा भय को नष्ट करने वाले गरुड़ करें।
इस प्रकार यह दिव्य कवच पापों का नाश करने वाला और सभी कामनाओं को पूरा करने वाला है।
🕉️ श्लोक ७
यः पठेत्प्रातरुत्थाय विषदोषं न पश्यति ।
त्रिसन्ध्यं पठते नित्यं बन्धनात् मुच्यते नरः ।
द्वादशाहं पठेद्यस्तु मुच्यते सर्वकिल्विषैः ॥ ७॥
भावार्थ:
जो व्यक्ति इस कवच का पाठ प्रातःकाल उठकर करता है, उसे विष का कोई दोष नहीं लगता।
जो इसे दिन में तीनों संध्याओं पर नियमित रूप से पढ़ता है, वह सब बन्धनों से मुक्त हो जाता है।
और जो बारह दिन तक इसका पाठ करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर पवित्र हो जाता है।
🕉️
॥ इति श्रीनारदगरुडसंवादे गरुडकवचं सम्पूर्णम् ॥
भावार्थ:
इस प्रकार नारद और गरुड़ के संवाद में वर्णित यह पवित्र गरुड़ कवच सम्पूर्ण हुआ।
🙏 FAQ :
Q1. श्री गरुड कवचम् का पाठ करने से क्या लाभ होता है?
A1. श्री गरुड कवचम् का पाठ भय, रोग, विष और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करता है।
Q2. श्री गरुड कवचम् कब पढ़ना चाहिए?
A2. इसे मंगलवार, शनिवार या विष्णु सम्बंधित तिथियों पर सुबह स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक पढ़ना शुभ होता है।
Q3. गरुड़ कवचम् किस शास्त्र से लिया गया है?
A3. श्री गरुड कवचम् ब्रह्माण्ड पुराण के उपखंडों में वर्णित है।
