श्रीगणपति रक्षा कवचम् | Shri Ganapati Raksha Kavacham

श्री गणपति रक्षा कवचम् का संपूर्ण पाठ, अर्थ, लाभ और पाठ विधि। यह शक्तिशाली कवच विघ्न विनाश, बाधा शांति, मानसिक शांति और हर कार्य में सफलता प्रदान करता है। गणेश भक्तों के लिए अत्यंत शुभ एवं फलदायी स्तोत्र।

॥ श्री गणपति रक्षाकवचम् ॥ कवि – श्री कृष्णदास

🕉 श्लोक 1

**पार्वतेयं महाकायं ऋद्धिसिद्धि-वरदायकम्

गणपतिं निधिपतिं सर्वजन-लोकोनायकम्
रुद्रप्रियं यज्ञकायं नमामि हे दीर्घकायकम्
हे गजानन गिरीजानन्दन रक्ष मां देव रक्ष माम् ।। 1 ।।**

हिंदी अर्थ —

जो पार्वती के पुत्र, विशाल देह वाले, ऋिद्धि–सिद्धि देने वाले और सभी लोकों के नायक हैं;
जो रुद्रप्रिय, यज्ञदेहधारी और समस्त धन–सम्पत्ति के स्वामी हैं —
ऐसे हे गजानन, गिरीजा के नन्दन! मुझे सदा-सर्वदा रक्षा करें।

English Meaning —

O son of Parvati, mighty-bodied Lord who grants Riddhi and Siddhi,
Lord of all treasures and guide of all beings,
Beloved of Shiva and embodiment of sacrifice —
O Gajanana, child of Girija, protect me always.


🕉 Shlok 2

**एकदन्तं कृपानन्तं सर्वांगसुन्दरदर्शनम्

वक्रतुंडं दिव्यऋण्डं अपूर्वमंगलस्पर्शनम्
लंबोदरं पीतांबरं नमामि हे रोमोहर्षणम्
हे गजानन गिरीजानन्दन रक्ष मां देव रक्ष माम् ।। 2 ।।**

हिंदी अर्थ —

एकदंत, अनंत कृपा वाले, जिनका रूप अत्यंत सुंदर है;
वक्रतुंड, दिव्य स्वरूप वाले, जिनका स्पर्श अद्भुत मंगलमय है;
लंबोदर, पीताम्बरधारी — ऐसे रोमांच जगाने वाले प्रभु मुझे रक्षा दें।

English Meaning —

I bow to the One-Tusked Lord, infinite in compassion, beautiful in every limb.
O Vakratunda, whose divine presence brings auspiciousness,
O Lambodara draped in yellow garments —
Protect me, O Gajanana!


🕉 Shlok 3

**प्रेममूर्तिं कामपूर्तिं चराचर-हृदस्पन्दनम्

मंत्रमुग्धं पापदग्धं अग्रपूज्य-देववन्दनम्
प्रथमेंशं श्रीगणेशं नमामि हे गौरीनन्दनम्
हे गजानन गिरीजानन्दन रक्ष मां देव रक्ष माम् ।। 3 ।।**

हिंदी अर्थ —

जो प्रेम के साक्षात स्वरूप हैं, इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं,
जिनके नाम से चराचर जगत का हृदय स्पंदित होता है;
जो मंत्रों को सिद्ध करने वाले हैं, पापों को जलाने वाले, और देवताओं में अग्रपूज्य हैं —
ऐसे श्रीगणेश, गौरीनंदन मेरी रक्षा करें।

English Meaning —

You are the embodiment of love, the fulfiller of desires,
The heartbeat of the entire universe.
Enchanter of mantras, destroyer of sins, first among the worshipped —
O son of Gauri, protect me always.


🕉 Shlok 4

**दिव्यतेजं कविराजं योगीजन-आत्मकारकम्

शिवानन्दं पराद्वन्दं भावप्रद-प्रेमधारकम्
विघ्ननाशं दीर्घश्वासं नमामि हे गर्वमारकम्
हे गजानन गिरीजानन्दन रक्ष मां देव रक्ष माम् ।। 4 ।।**

हिंदी अर्थ —

जो दिव्य तेज वाले, काव्य के अधिपति और योगियों को आत्मज्ञान देने वाले हैं;
जो शिवानंद हैं, द्वेष का अंत करने वाले, भक्तों को भाव और प्रेम देने वाले;
विघ्नों का नाश करने वाले और अहंकार को दूर करने वाले हैं — वे प्रभु मेरी रक्षा करें।

English Meaning —

O embodiment of divine radiance, master of poetry, giver of inner realization to yogis,
Source of bliss like Shiva, dispeller of negativity, giver of love and devotion,
Destroyer of obstacles and remover of pride —
Protect me, O Gajanana!


🕉 Shlok 5

**प्रथमं मयूरेश्वरं द्वितीयं सिद्धिविनायकम्

ततश्च भल्लालेश्वरम् अस्ति वरदाविनायकम्
पंचमं चिंतामणिदेवं षष्ठं च गिरिजात्मजम्
विघ्नेश्वरं महागणपतिम् नमामि अष्ट देवम्
हे गजानन गिरीजानन्दन रक्ष मां देव रक्ष माम् ।। 5 ।।**

हिंदी अर्थ —

गणपति के आठ स्वरूप —
मयूरेश्वर, सिद्धिविनायक, भल्लालेश्वर, वरदविनायक, चिंतामणि देव, गिरिजात्मज, विघ्नेश्वर और महागणपति —
इन सभी अष्टविनायक स्वरूपों को मैं नमन करता हूँ। वे मेरी रक्षा करें।

English Meaning —

I bow to the eight sacred forms of Lord Ganesha —
Mayureshwar, Siddhivinayak, Ballaleshwar, Varad Vinayak,
Chintamani, Girijatmaja, Vighneshwar, and Mahaganapati.
O Gajanana, protect me always.


🕉 Shlok 6 (फलश्रुति)

**तरूणी लभते वरं च प्रीत्यार्थी लभते प्रेमम्

विद्यार्थी लभते विद्यां च मोक्ष्यार्थी लभते धामम्
अर्थार्थी लभते अर्थम् च कामार्थी लभते कामम्
हे गजानन गिरीजानन्दन कृष्णदासः भजति त्वाम् ।। 6 ।।**

हिंदी अर्थ —

जो विवाह की इच्छा रखते हैं वे योग्य वर पाते हैं, प्रेम चाहने वाले प्रेम पाते हैं;
विद्यार्थी ज्ञान पाते हैं, मोक्ष चाहने वाले मोक्ष धाम पाते हैं;
धन चाहने वाले धन पाते हैं और कामना करने वाले अपनी कामनाएँ पूरी करते हैं।
कवि कृष्णदास कहते हैं—हे गणेश! मैं आपकी ही भक्ति करता हूँ।

English Meaning —

A bride seeks a worthy groom, a devotee gains love,
A student acquires knowledge, and a seeker attains liberation.
One who desires wealth gains wealth, and one who seeks fulfillment obtains it.
O Gajanana, Krishna Das worships You alone.

FAQs 

1. श्री गणपति रक्षा कवच का पाठ कब करना चाहिए?

सुबह स्नान के बाद या गणेश चतुर्थी के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या बाधाओं के समय इसका पाठ किया जाता है।

2. गणपति रक्षा कवच से क्या लाभ होते हैं?

यह कवच विघ्नों का नाश करता है, मन को शांत करता है, कार्यसिद्धि प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।

3. क्या इस कवच के लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता होती है?

साफ-सफाई, शुद्ध मन और गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।

4. क्या श्री गणपति रक्षा कवच घर पर पढ़ा जा सकता है?

हाँ, यह घर में, पूजा स्थान में या किसी भी शांत स्थान पर पढ़ा जा सकता है।

5. क्या यह कवच बच्चों या छात्रों के लिए लाभकारी है?

हाँ, यह बुद्धि, स्मृति, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाता है—छात्रों के लिए अत्यंत शुभ।