शिव के 108 नाम | भगवान शिव के पावन नाम | शिव कृपा व शांति हेतु

भगवान शिव के 108 नाम अत्यंत पावन और फलदायी माने जाते हैं। इन नामों का नियमित पाठ करने से शिव कृपा प्राप्त होती है, मन को शांति मिलती है तथा जीवन के कष्टों का नाश होता है। यह सूची शिवभक्तों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

🕉️ श्री शिव अष्टोत्तर शतनामावली (108 नाम)

1. शिव
ॐ शिवाय नमः।
— जो कल्याणस्वरूप हैं

2. महेश्वर
ॐ महेश्वराय नमः।
— जो देवों के भी देव हैं

3. शम्भु
ॐ शम्भवे नमः।
— जो सुख-सम्पत्ति प्रदान करते हैं

4. पिनाकी
ॐ पिनाकिने नमः।
— जो पिनाक धनुष धारण करते हैं

5. शशिशेखर
ॐ शशिशेखराय नमः।
— जो मस्तक पर चन्द्रमा धारण करते हैं

6. वामदेव
ॐ वामदेवाय नमः।
— जो पूर्णतः शुभ और सुन्दर हैं

7. विरूपाक्ष
ॐ विरूपाक्षाय नमः।
— जिनका विलक्षण तृतीय नेत्र है

8. कपर्दी
ॐ कपर्दिने नमः।
— जो जटा धारण करने वाले हैं

9. नीललोहित
ॐ नीललोहिताय नमः।
— जिनका वर्ण नील एवं लोहित है

10. शंकर
ॐ शंकराय नमः।
— जो मंगल करने वाले हैं

11. शूलपाणी
ॐ शूलपाणिने नमः।
— जो त्रिशूल धारण करते हैं

12. खट्वाङ्गी
ॐ खट्वाङ्गिने नमः।
— जो खट्वाङ्ग अस्त्र धारण करते हैं

13. विष्णुवल्लभ
ॐ विष्णुवल्लभाय नमः।
— जो भगवान विष्णु को प्रिय हैं

14. शिपिविष्ट
ॐ शिपिविष्टाय नमः।
— जो दिव्य तेज से युक्त हैं

15. अम्बिकानाथ
ॐ अम्बिकानाथाय नमः।
— जो माता पार्वती के स्वामी हैं

16. श्रीकण्ठ
ॐ श्रीकण्ठाय नमः।
— जिनका कण्ठ शोभायमान है

17. भक्तवत्सल
ॐ भक्तवत्सलाय नमः।
— जो भक्तों से अपार प्रेम करते हैं

18. भव
ॐ भवाय नमः।
— जो सृष्टि के कारण हैं

19. शर्व
ॐ शर्वाय नमः।
— जो पापों का नाश करते हैं

20. त्रिलोकेश
ॐ त्रिलोकेशाय नमः।
— जो तीनों लोकों के स्वामी हैं

21. शितिकण्ठ
ॐ शितिकण्ठाय नमः।
— जिनका कण्ठ श्वेत है

22. शिवाप्रिय
ॐ शिवाप्रियाय नमः।
— जो पार्वती को प्रिय हैं

23. उग्र
ॐ उग्राय नमः।
— जिनका रूप उग्र है

24. कपाली
ॐ कपालिने नमः।
— जो कपालमाला धारण करते हैं

25. कामारि
ॐ कामारये नमः।
— जो कामदेव के शत्रु हैं

26. अन्धकासुरसूदन
ॐ अन्धकासुरसूदनाय नमः।
— जिन्होंने अन्धकासुर का वध किया

27. गङ्गाधर
ॐ गङ्गाधराय नमः।
— जो गंगा को जटाओं में धारण करते हैं

28. ललाटाक्ष
ॐ ललाटाक्षाय नमः।
— जिनके ललाट पर नेत्र है

29. कालकाल
ॐ कालकालाय नमः।
— जो मृत्यु के भी स्वामी हैं

30. कृपानिधि
ॐ कृपानिधये नमः।
— जो करुणा के सागर हैं

31. भीम
ॐ भीमाय नमः।
— जो अपार बलशाली हैं

32. परशुहस्त
ॐ परशुहस्ताय नमः।
— जो फरसा धारण करते हैं

33. मृगपाणि
ॐ मृगपाणये नमः।
— जो मृग धारण करने वाले हैं

34. जटाधर
ॐ जटाधराय नमः।
— जो जटाओं से सुशोभित हैं

35. कैलासवासी
ॐ कैलासवासिने नमः।
— जो कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं

36. कवची
ॐ कवचिने नमः।
— जो कवच धारण करते हैं

37. कठोर
ॐ कठोराय नमः।
— जो अत्यन्त दृढ़ हैं

38. त्रिपुरान्तक
ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः।
— जिन्होंने त्रिपुरासुर का संहार किया

39. वृषाङ्क
ॐ वृषाङ्काय नमः।
— जिनके ध्वज पर नन्दी है

40. वृषभारूढ
ॐ वृषभारूढाय नमः।
— जो नन्दी पर विराजमान हैं

41. भस्मोद्धूलितविग्रह
ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः।
— जो भस्म से अलंकृत हैं

42. सामप्रिय
ॐ सामप्रियाय नमः।
— जिन्हें सामवेद प्रिय है

43. स्वरमय
ॐ स्वरमयाय नमः।
— जो सातों स्वरों में स्थित हैं

44. त्रयीमूर्ति
ॐ त्रयीमूर्तये नमः।
— जो तीनों वेदों के स्वरूप हैं

45. अनीश्वर
ॐ अनीश्वराय नमः।
— जो स्वयं सर्वस्वामी हैं

46. सर्वज्ञ
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
— जो सब कुछ जानते हैं

47. परमात्मा
ॐ परमात्मने नमः।
— जो परम सत्य हैं

48. सोमसूर्याग्निलोचन
ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः।
— जिनके नेत्र चन्द्र, सूर्य व अग्नि हैं

49. हविस्
ॐ हविषे नमः।
— जो यज्ञ की आहुति हैं

50. यज्ञमय
ॐ यज्ञमयाय नमः।
— जो स्वयं यज्ञ हैं

51. सोम
ॐ सोमाय नमः।
— जो शीतल और सौम्य हैं

52. पञ्चवक्त्र
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।
— जिनके पाँच मुख हैं

53. सदाशिव
ॐ सदाशिवाय नमः।
— जो सदा कल्याणकारी हैं

54. विश्वेश्वर
ॐ विश्वेश्वराय नमः।
— जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं

55. वीरभद्र
ॐ वीरभद्राय नमः।
— जो उग्र रूप हैं

56. गणनाथ
ॐ गणनाथाय नमः।
— जो गणों के स्वामी हैं

57. प्रजापति
ॐ प्रजापतये नमः।
— जो समस्त प्रजा के अधिपति हैं

58. हिरण्यरेता
ॐ हिरण्यरेतसे नमः।
— जिनका तेज स्वर्ण समान है

59. दुर्धर्ष
ॐ दुर्धर्षाय नमः।
— जिन्हें पराजित नहीं किया जा सकता

60. गिरीश
ॐ गिरीशाय नमः।
— जो पर्वतों के स्वामी हैं

61. गिरिश
ॐ गिरिशाय नमः।
Om Girishaya Namah.
— जो कैलाश पर्वत पर शयन करने वाले हैं

62. अनघ
ॐ अनघाय नमः।
Om Anaghaya Namah.
— जो पापों से रहित हैं

63. भुजङ्गभूषण
ॐ भुजङ्गभूषणाय नमः।
Om Bhujangabhushanaya Namah.
— जो सर्पों को आभूषण के रूप में धारण करते हैं

64. भर्ग
ॐ भर्गाय नमः।
Om Bhargaya Namah.
— जो समस्त पापों का नाश करने वाले हैं

65. गिरिधन्वा
ॐ गिरिधन्विने नमः।
Om Giridhanvine Namah.
— जो मेरु पर्वत को धनुष के रूप में धारण करते हैं

66. गिरिप्रिय
ॐ गिरिप्रियाय नमः।
Om Giripriyaya Namah.
— जिन्हें पर्वत अत्यन्त प्रिय हैं

67. कृत्तिवासा
ॐ कृत्तिवाससे नमः।
Om Krittivasase Namah.
— जो गजचर्म धारण करने वाले हैं

68. पुराराति
ॐ पुरारातये नमः।
Om Purarataye Namah.
— जो त्रिपुरासुर एवं तीनों लोकों का संहार करने वाले हैं

69. भगवान्
ॐ भगवते नमः।
Om Bhagavate Namah.
— जो परम पिता परमेश्वर हैं

70. प्रमथाधिप
ॐ प्रमथाधिपाय नमः।
Om Pramathadhipaya Namah.
— जो प्रमथगणों (शिवगणों) के अधिपति हैं

71. मृत्युञ्जय
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।
Om Mrityunjayaya Namah.
— जो मृत्यु पर विजय प्रदान करते हैं

72. सूक्ष्मतनु
ॐ सूक्ष्मतनवे नमः।
Om Sukshmatanave Namah.
— जो सूक्ष्म देह धारण करने वाले हैं

73. जगद्व्यापी
ॐ जगद्व्यापिने नमः।
Om Jagadvyapine Namah.
— जो सम्पूर्ण सृष्टि में व्याप्त हैं

74. जगद्गुरु
ॐ जगद्गुरवे नमः।
Om Jagadgurave Namah.
— जो समस्त लोकों के गुरु हैं

75. व्योमकेश
ॐ व्योमकेशाय नमः।
Om Vyomakeshaya Namah.
— जिनके केश सम्पूर्ण आकाश में व्याप्त हैं

76. महासेनजनक
ॐ महासेनजनकाय नमः।
Om Mahasenajanakaya Namah.
— जो भगवान कार्तिकेय के पिता हैं

77. चारुविक्रम
ॐ चारुविक्रमाय नमः।
Om Charuvikramaya Namah.
— जो सौन्दर्य और पराक्रम में अद्वितीय हैं

78. रुद्र
ॐ रुद्राय नमः।
Om Rudraya Namah.
— जो भयंकर एवं संहारक स्वरूप वाले हैं

79. भूतपति
ॐ भूतपतये नमः।
Om Bhutapataye Namah.
— जो भूत-प्रेत एवं पंचमहाभूतों के स्वामी हैं

80. स्थाणु
ॐ स्थाणवे नमः।
Om Sthanave Namah.
— जो अचल, स्थिर और शाश्वत हैं

81. अहिर्बुध्न्य
ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः।
Om Ahirbudhnyaya Namah.
— जो कुण्डलिनी शक्ति के अधिपति हैं

82. दिगम्बर
ॐ दिगम्बराय नमः।
Om Digambaraya Namah.
— जो दिशाओं को वस्त्र रूप में धारण करते हैं

83. अष्टमूर्ति
ॐ अष्टमूर्तये नमः।
Om Ashtamurtaye Namah.
— जो आठ रूपों में प्रतिष्ठित हैं

84. अनेकात्मा
ॐ अनेकात्मने नमः।
Om Anekatmane Namah.
— जो अनेक रूप धारण करने वाले हैं

85. सात्त्विक
ॐ सात्त्विकाय नमः।
Om Sattvikaya Namah.
— जो परम सात्त्विक स्वरूप हैं

86. शुद्धविग्रह
ॐ शुद्धविग्रहाय नमः।
Om Shuddhavigrahaya Namah.
— जिनका स्वरूप पूर्णतः शुद्ध और निर्मल है

87. शाश्वत
ॐ शाश्वताय नमः।
Om Shashvataya Namah.
— जो नित्य और अविनाशी हैं

88. खण्डपरशु
ॐ खण्डपरशवे नमः।
Om Khandaparashave Namah.
— जो परशु (फरसा) धारण करने वाले हैं

89. अज
ॐ अजाय नमः।
Om Ajaya Namah.
— जो अजन्मा और शाश्वत हैं

90. पाशविमोचक
ॐ पाशविमोचकाय नमः।
Om Pashavimochakaya Namah.
— जो समस्त सांसारिक बन्धनों से मुक्त करते हैं

91. मृड
ॐ मृडाय नमः।
Om Mridaya Namah.
— जो सुख और कल्याण प्रदान करते हैं

92. पशुपति
ॐ पशुपतये नमः।
Om Pashupataye Namah.
— जो समस्त जीवों के स्वामी हैं

93. देव
ॐ देवाय नमः।
Om Devaya Namah.
— जो सभी के आराध्य देव हैं

94. महादेव
ॐ महादेवाय नमः।
Om Mahadevaya Namah.
— जो देवों के भी देव हैं

95. अव्यय
ॐ अव्ययाय नमः।
Om Avyayaya Namah.
— जो अविनाशी हैं

96. हरि
ॐ हरये नमः।
Om Haraye Namah.
— जो समस्त दुःखों को हरने वाले हैं

97. पूषदन्तभिद्
ॐ पूषदन्तभिदे नमः।
Om Pushadantabhide Namah.
— जिन्होंने पूषन देव के दाँत तोड़े

98. अव्यग्र
ॐ अव्यग्राय नमः।
Om Avyagraya Namah.
— जो स्थिर, अटल और अविचल हैं

99. दक्षाध्वरहर
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः।
Om Dakshadhvaraharaya Namah.
— जिन्होंने दक्ष प्रजापति के यज्ञ का नाश किया

100. हर
ॐ हराय नमः।
Om Haraya Namah.
— जो समस्त पापों का नाश करते हैं

101. भगनेत्रभित्
ॐ भगनेत्रभिदे नमः।
Om Bhaganetrabhide Namah.
— जिन्होंने भग देवता का नेत्र नष्ट किया

102. अव्यक्त
ॐ अव्यक्ताय नमः।
Om Avyaktaya Namah.
— जो अप्रकट एवं निर्गुण हैं

103. सहस्राक्ष
ॐ सहस्राक्षाय नमः।
Om Sahasrakshaya Namah.
— जिनके सहस्र नेत्र हैं

104. सहस्रपात्
ॐ सहस्रपदे नमः।
Om Sahasrapade Namah.
— जिनके सहस्र चरण हैं

105. अपवर्गप्रद
ॐ अपवर्गप्रदाय नमः।
Om Apavargapradaya Namah.
— जो मोक्ष प्रदान करने वाले हैं

106. अनन्त
ॐ अनन्ताय नमः।
Om Anantaya Namah.
— जो अनन्त और असीम हैं

107. तारक
ॐ तारकाय नमः।
Om Tarakaya Namah.
— जो जीवों को सद्गति प्रदान करते हैं

108. परमेश्वर
ॐ परमेश्वराय नमः।
Om Parameshvaraya Namah.
— जो पराशक्ति, परब्रह्म, परमात्मा हैं

                                                           ॥ इति श्रीशिवाष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णा ॥

 

🔱 शिव के 108 नामों का महत्व (Labh / Benefits)

  • 🕉️ मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति

  • 🕉️ नकारात्मक ऊर्जा और भय का नाश

  • 🕉️ रोग, शोक और बाधाओं से रक्षा

  • 🕉️ शिव कृपा से जीवन में स्थिरता

  • 🕉️ ध्यान और साधना में एकाग्रता

  • 🕉️ मोक्ष मार्ग की ओर प्रेरणा

  • 🕉️ सोमवार व महाशिवरात्रि पूजन में विशेष फ

🔱 FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

❓ शिव के 108 नाम कब पढ़ने चाहिए?

उत्तर: शिव के 108 नाम प्रातःकाल, सोमवार, महाशिवरात्रि, श्रावण मास या रुद्राभिषेक के समय पढ़ना विशेष फलदायी होता है।


❓ क्या 108 नामों का जप बिना दीक्षा के किया जा सकता है?

उत्तर: हाँ, शिव के नाम सार्वभौमिक हैं। इन्हें कोई भी श्रद्धा व भक्ति से जप सकता है।


❓ 108 नामों का जप कितनी बार करना चाहिए?

उत्तर: प्रतिदिन एक बार या कम से कम सोमवार को एक बार करना श्रेष्ठ माना गया है।