राहु-केतु कवच | Rahu Ketu Kavacham

राहु-केतु कवच राहु और केतु ग्रहों के दोषों से मुक्ति दिलाने वाला शक्तिशाली स्तोत्र है। इसका पाठ करने से कालसर्प दोष और राहु-केतु दोष के दुष्प्रभाव कम होते हैं तथा शांति और सफलता प्राप्त होती है।

राहु कवच॥ 

अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः । अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं । नमः शक्तिः । स्वाहा कीलकम् । राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥

 प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिन् ॥ 

सैन्हिकेयं करालास्यं लोकानाम भयप्रदम् ॥

 निलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः ।  चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान् ॥

 नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम । जिव्हां मे सिंहिकासूनुः कंठं मे कठिनांघ्रीकः ॥

 भुजङ्गेशो भुजौ पातु निलमाल्याम्बरः करौ । पातु वक्षःस्थलं मंत्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः ॥ 

कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः । स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा ॥

 गुल्फ़ौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः । सर्वाणि अंगानि मे पातु निलश्चंदनभूषण: ॥ 

राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो । भक्ता पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् । प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात् ॥ 

॥केतु कवच॥ 

अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्रमंत्रस्य त्र्यंबक ऋषिः । अनुष्टप् छन्दः । केतुर्देवता । कं बीजं । नमः शक्तिः । केतुरिति कीलकम् I केतुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥ 

केतु करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम् । प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम् ॥ 

चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः । पातु नेत्रे पिंगलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः ॥

 घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः । पातु कंठं च मे केतुः स्कंधौ पातु ग्रहाधिपः ॥ 

हस्तौ पातु श्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः । सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः ॥ 

ऊरुं पातु महाशीर्षो जानुनी मेSतिकोपनः । पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिंगलः ॥

 य इदं कवचं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम् । सर्वशत्रुविनाशं च धारणाद्विजयि भवेत् ॥

🌟 लाभ (Benefits of Ketu Kavach)

केतु महादशा/अंतरदशा के कष्टों से रक्षा करता है।

रोग, दुर्घटना और शत्रु बाधाओं से मुक्ति।

मानसिक स्थिरता और एकाग्रता में वृद्धि।

आध्यात्मिक उन्नति और ध्यान में सहायक।

विजय, आरोग्य और सुरक्षा प्रदान करने वाला।

(FAQ)

प्रश्न 1: राहु-केतु कवच क्या है?
उत्तर: राहु-केतु कवच एक पवित्र स्तोत्र है, जिसका पाठ राहु और केतु ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा प्रदान करता है।

प्रश्न 2: राहु-केतु कवच पाठ करने के लाभ क्या हैं?
उत्तर: इस स्तोत्र के नियमित पाठ से राहु-केतु दोष शांत होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।

प्रश्न 3: राहु-केतु कवच का पाठ कब करना चाहिए?
उत्तर: इसका पाठ मंगलवार, शनिवार या राहुकाल के समय करना श्रेष्ठ माना गया है।

प्रश्न 4: किन लोगों को राहु-केतु कवच का पाठ करना चाहिए?
उत्तर: जिनकी कुंडली में राहु-केतु दोष, कालसर्प दोष या ग्रहों के कारण बार-बार रुकावटें आती हैं, उन्हें इसका पाठ अवश्य करना चाहिए।