पंचदेवता स्तोत्रम् | Panch devta stotra
पंचदेवता स्तोत्रम् भगवान शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य और देवी की सामूहिक स्तुति है। इसका पाठ करने से सभी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में शांति, सुख-समृद्धि तथा उन्नति मिलती है।
श्लोक १
गणेशविष्णुसूर्येशदुर्गाख्यं देवपञ्चकं।
वन्दे विशुद्धमनसा जनसायुज्यदायकम्॥ १॥
🪔 हिंदी अर्थ –
मैं गणेश, विष्णु, सूर्य, शिव और दुर्गा – इन पाँच देवताओं का शुद्ध मन से वंदन करता हूँ, जो अपने उपासकों को परम ऐक्य (ईश्वर-सान्निध्य) प्रदान करते हैं।
🌍 English Meaning –
I bow with a pure heart to the five deities – Ganesha, Vishnu, Surya, Shiva, and Durga – who bless devotees with divine union and liberation.
श्लोक २
एकरूपान् भिन्नमूर्तीन् पञ्चदेवान् नमस्कृतान्।
वन्दे विशुद्धभावेन ईशाम्बेनैकरदाच्युतान् ॥ २॥
🪔 हिंदी अर्थ –
जो वास्तव में एक ही हैं पर अनेक रूपों में प्रकट होते हैं, उन पंचदेवताओं (ईश, अंबा, एकदंत, अच्युत) को मैं निर्मल भाव से नमस्कार करता हूँ।
🌍 English Meaning –
Though essentially one, the five deities manifest in different forms. With pure devotion, I worship Ish (Shiva), Amba (Durga), Ekadanta (Ganesha), and Achyuta (Vishnu).
श्लोक ३
कल्याणदायिनो देवान् नमस्कार्यान् महौजसः।
विष्णुशंभुशिवासूर्यगणेशाख्यान् नमाम्यहम् ॥ ३॥
🪔 हिंदी अर्थ –
मैं उन महान तेजस्वी देवताओं विष्णु, शंभु (शिव), सूर्य और गणेश को प्रणाम करता हूँ, जो कल्याण और मंगल प्रदान करते हैं।
🌍 English Meaning –
I bow to the radiant deities – Vishnu, Shambhu (Shiva), Surya, and Ganesha – who bestow well-being and auspiciousness.
श्लोक ४
एकात्मनो भिन्नरूपान् लोकरक्षणतत्परान्।
शिवविष्णुशिवासूर्यहेरंबान् प्रणमाम्यहम् ॥ ४॥
🪔 हिंदी अर्थ –
जो एक ही स्वरूप के होते हुए भी विभिन्न रूप धारण कर लोकों की रक्षा करते हैं, उन शिव, विष्णु, सूर्य और हेरंब (गणेश) को मैं प्रणाम करता हूँ।
🌍 English Meaning –
Though one in essence, they appear in diverse forms for the protection of the worlds – to Shiva, Vishnu, Surya, and Heramba (Ganesha), I bow.
श्लोक ५
दिव्यरूपानेकरूपान् नानारूपान्नमस्कृतान्।
शिवाशंकरहेरंबविणुसूर्यान् नमाम्यहम् ॥ ५॥
🪔 हिंदी अर्थ –
जिनका दिव्य स्वरूप अनेकों रूपों में पूजित है, उन शिव, शंकर, हेरंब (गणेश), विष्णु और सूर्य को मैं नमस्कार करता हूँ।
🌍 English Meaning –
I revere the divine beings of many forms – Shiva, Shankara, Heramba (Ganesha), Vishnu, and Surya – who are worshipped by all.
श्लोक ६
नित्यानानन्दसन्दोहदायिनो दीनपालकान्।
शिवाच्युतगणेशेनदुर्गाख्यान् नौम्यहं सुरान्॥ ६॥
🪔 हिंदी अर्थ –
मैं उन देवताओं शिव, अच्युत (विष्णु), गणेश और दुर्गा को नमस्कार करता हूँ, जो सदैव आनंद और कृपा प्रदान करते हैं तथा दीनजनों का पालन करते हैं।
🌍 English Meaning –
I bow to Shiva, Achyuta (Vishnu), Ganesha, and Durga – the compassionate deities who grant eternal bliss and protect the humble.
श्लोक ७
कमनीयतनून् देवान् सेवावश्यान् कृपावतः।
शंकरेनशिवाविष्णुगणेशाख्यान् नमाम्यहम् ॥ ७॥
🪔 हिंदी अर्थ –
शंकर, ईश, शिव, विष्णु और गणेश – ये मनोहर रूप वाले, कृपालु और भक्तों की सेवा स्वीकार करने वाले देवता हैं। मैं इन्हें प्रणाम करता हूँ।
🌍 English Meaning –
To Shankara, Isha, Shiva, Vishnu, and Ganesha – the graceful, merciful deities who accept the service of devotees – I bow in reverence.
श्लोक ८
सूर्यविष्णुशिवाशंभुविघ्नराजाभिधान् सुरान्।
एकरूपान् सदा वन्दे सुखसन्दोहसिद्धये ॥ ८॥
🪔 हिंदी अर्थ –
मैं सदा सूर्य, विष्णु, शिव, शंभु और विघ्नराज (गणेश) – इन देवताओं को एकरूप मानकर प्रणाम करता हूँ, जिससे जीवन में सुख और सफलता मिलती है।
🌍 English Meaning –
I forever worship Surya, Vishnu, Shiva, Shambhu, and Vighnaraja (Ganesha) as one in essence, for the attainment of joy and prosperity.
श्लोक ९ (समापन)
हरौ हरे तीक्ष्णकरे गणेशे शक्तौ न भेदो जगदादिहेतुषु।
🪔 हिंदी अर्थ –
हरि (विष्णु), हर (शिव), गणेश और शक्ति – इन सब में कोई भेद नहीं है। ये सभी जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार के कारण हैं।
🌍 English Meaning –
Between Hari (Vishnu), Hara (Shiva), Ganesha, and Shakti, there is no distinction; all are the causes of creation, sustenance, and dissolution of the universe.
FAQ Section
Q1. पंचदेवता स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
सुबह स्नान के बाद या संध्या समय स्वच्छ मन से पाठ करना श्रेष्ठ माना जाता है।
Q2. पंचदेवता स्तोत्र में किन देवताओं की स्तुति होती है?
इसमें भगवान शिव, विष्णु, गणेश, सूर्य और देवी की स्तुति की जाती है।
Q3. पंचदेवता स्तोत्र का लाभ क्या है?
इसका पाठ करने से विघ्नों का नाश, मानसिक शांति, घर-परिवार में सुख-समृद्धि और सभी देवी-देवताओं की कृपा मिलती है।
Q4. क्या पंचदेवता स्तोत्र रोज पढ़ा जा सकता है?
हाँ, इसे रोज या विशेष पर्व, व्रत, पूजा अथवा संकटकाल में पढ़ना शुभ माना जाता है।
