मङ्गलाचरणम् : Mangalacharanam | गणपति स्तोत्रम् | शुभारंभ का मंगल पाठ

पढ़ें श्री गणपति मंगलाचरण स्तोत्रम् — हर आरंभ के पहले श्री गणेश को नमन करें और जीवन में मंगल का आशीर्वाद प्राप्त करें।

🕉️ ॥ मङ्गलाचरणम् ॥

श्लोक १
स जयति सिन्धुरवदनो देवो यत्पादपङ्कजस्मरणम् ।
वासरमणिरिव तमसां राशिं नाशयति विघ्नानाम् ॥१॥

अनुवाद (हिंदी अर्थ):
वह सिंदूरवर्ण (लालवर्ण) वाले श्रीगणेश देवता जय प्राप्त करें, जिनके चरणकमलों का स्मरण करने से, जैसे सूर्य उदय होते ही अंधकार नष्ट हो जाता है, वैसे ही सभी विघ्न नष्ट हो जाते हैं।


श्लोक २
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः ।
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः ॥२॥

अनुवाद:
श्रीगणेश जी के बारह नाम हैं — सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट, विघ्ननाश, गणाधिप, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र और गजानन।


श्लोक ३
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः ।
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि ॥३॥

अनुवाद:
जो मनुष्य इन बारह नामों का नित्य पाठ या श्रवण करता है,
वह सब प्रकार के विघ्नों से मुक्त होता है और सुख-समृद्धि प्राप्त करता है।


श्लोक ४
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।
सङ्ग्रामे सङ्कटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ॥४॥

अनुवाद:
विद्याारंभ, विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा या किसी कार्य में प्रवेश अथवा संकट के समय
जो व्यक्ति इन नामों का जप करता है, उसके मार्ग में कोई विघ्न उत्पन्न नहीं होता।


श्लोक ५
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम् ।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वाविघ्नोपशान्तये ॥५॥

अनुवाद:
जो श्वेत वस्त्र धारण किए हुए, चतुर्भुज, चन्द्र के समान उज्ज्वल और प्रसन्न मुख वाले भगवान गणेश का ध्यान करता है,
उसके सभी विघ्न शांत हो जाते हैं।


श्लोक ६
व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्रमकल्मषम् ।
पराशरात्मजं वन्दे शुकतातं तपोनिधिम् ॥६॥

अनुवाद:
मैं व्यासजी को नमस्कार करता हूँ — जो वसिष्ठ मुनि के पौत्र, शक्ति के पुत्र, पराशर मुनि के सुपुत्र,
शुकदेव के पिता और तपस्या के भंडार हैं।


श्लोक ७
व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे ।
नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः ॥७॥

अनुवाद:
व्यास जो विष्णु के रूप हैं और विष्णु जो व्यास के रूप हैं —
ऐसे ब्रह्मस्वरूप, वसिष्ठ वंशज श्री व्यासजी को बारंबार नमस्कार है।


श्लोक ८
अचतुर्वदनो ब्रह्मा द्विबाहुरपरो हरिः ।
अभाललोचनः शम्भुर्भगवान् बादरायणः ॥८॥

अनुवाद:
चार मुखों वाले ब्रह्मा, दो भुजाओं वाले हरि (विष्णु), और बिना तीसरे नेत्र वाले शंकर —
इन सबके रूपों का संगम भगवान बादरायण (वेदव्यास) हैं।


॥ इति मङ्गलाचरणं सम्पूर्णम् ॥


📿 संक्षेप में भावार्थ:
यह मङ्गलाचरणम् श्री गणेश और श्री व्यास जी को नमन करता है, जो हर कार्य, पूजा या ग्रंथ की शुरुआत में किया जाता है।
इसका पाठ करने से ज्ञान, बुद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं, तथा सभी विघ्न दूर होते हैं।

FAQ :-

❓ मङ्गलाचरणम् क्या है?

मङ्गलाचरणम् वह पवित्र पाठ है जो किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में भगवान गणेश की वंदना के रूप में किया जाता है।

❓ गणपति स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

हर नए कार्य, यात्रा या पूजा की शुरुआत से पहले गणपति स्तोत्र का पाठ करने से विघ्न दूर होते हैं और कार्य में सफलता मिलती है।

❓ मङ्गलाचरणम् पाठ करने के क्या लाभ हैं?

यह पाठ बुद्धि, ज्ञान और शुभता प्रदान करता है। इससे जीवन में शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।