केवलाष्टकम् | भगवान विष्णु दिव्य स्तोत्र | Kevalashtakam | अपरा एकादशी विशेष
केवलाष्टकम् भगवान विष्णु भगवान की स्तुति में रचित एक पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। यह स्तोत्र विशेष रूप से अपरा एकादशी के दिन पाठ करने से अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसके जप से पापों का नाश, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
केवलाष्टकम्
मधुरं मधुरेभ्योऽपि मङ्गलेभ्योऽपि मङ्गलम् ।
पावनं पावनेभ्योऽपि हरेर्नामैव केवलम् ॥ १ ॥
आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं सर्वं मायामयं जगत् ।
सत्यं सत्यं पुनः सत्यं हरेर्नामैव केवलम् ॥ २ ॥
स गुरुः स पिता चापि सा माता बान्धवोऽपि सः ।
शिक्षयेच्चेत् सदा स्मर्तुं हरेर्नामैव केवलम् ॥ ३ ॥
निःश्वासे न हि विश्वासः कदा रुद्धो भविष्यति ।
कीर्तनीयमतो बाल्याद्धरेर्नामैव केवलम् ॥ ४ ॥
हरिः सदा वसेत्तत्र यत्र भागवता जनाः ।
गायन्ति भक्तिभावेन हरेर्नामैव केवलम् ॥ ५ ॥
अहो दुःखं महादुःखं दुःखाद्दुःखतरं यतः ।
काचार्थं विस्मृतं रत्नं हरेर्नामैव केवलम् ॥ ६ ॥
दीयतां दीयतां कर्णो नीयतां नीयतां वचः ।
गीयतां गीयतां नित्यं हरेर्नामैव केवलम् ॥ ७ ॥
तृणीकृत्य जगत्सर्वं राजते सकलोपरि ।
चिदानन्दमयं शुद्धं हरेर्नामैव केवलम् ॥ ८ ॥
इति केवलाष्टकम् ॥
✨ लाभ (Benefits)
- 🧘 पापों का नाश और आत्मशुद्धि
- 🌟 मोक्ष प्राप्ति की दिशा में सहायता
- 🙏 भगवान विष्णु की कृपा
- 🧠 मानसिक शांति और संतुलन
- 💫 सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति
- 🛡️ जीवन के कष्टों से मुक्ति
❓ FAQ
1. केवलाष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?
अपरा एकादशी के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी होता है। साथ ही प्रतिदिन भी किया जा सकता है।
2. यह स्तोत्र किसके लिए उपयोगी है?
यह उन सभी के लिए उपयोगी है जो पापों से मुक्ति, शांति और मोक्ष की इच्छा रखते हैं।
3. क्या इससे पापों का नाश होता है?
हाँ, यह स्तोत्र आत्मशुद्धि और पापों के नाश में सहायक माना जाता है।
4. कितनी बार पाठ करना चाहिए?
प्रतिदिन 1 या 3 बार पाठ करना शुभ होता है।
5. क्या कोई भी इसका पाठ कर सकता है?
हाँ, श्रद्धा और भक्ति से कोई भी इसका पाठ कर सकता है।
