जिवती आरती | जरा-जिवती मातेची आरती | श्रावण शुक्रवार विशेष
जिवती आरती जरा-जिवती माता की श्रद्धापूर्वक की जाने वाली आरती है। महाराष्ट्र में श्रावण मास के शुक्रवार को जिवती माता की पूजा और आरती करने की परंपरा है। इस विशेष अवसर पर माता से परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, सौभाग्य और संतान की मंगलकामना की जाती है।
ध्रुवपद
जयदेवी जयदेवी जय जिवती जननी ।
सुखी ठेवी संतति विनंति तव चरणी ॥ धृ. ॥
हिन्दी अर्थ:
हे जिवती जननी माता! आपकी जय हो, जय हो। हे माता, हमारी संतान को सुखी और सुरक्षित रखें। हम आपके चरणों में यही विनम्र प्रार्थना करते हैं।
English Meaning:
Victory and salutations to Mother Jivati, the Divine Mother. O Mother, please keep our children happy, safe and blessed. This is our humble prayer at Your holy feet.
॥ १ ॥
श्रावण येतांचि आणूं प्रतिमा ।
गृहांत स्थापूनि करुं पूजना ।
आघाडा दूर्वा माळा वाहूं या ।
अक्षता घेऊनि कहाणी सांगू या ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ:
श्रावण मास के आते ही हम जिवती माता की प्रतिमा घर में लाते हैं। उसे घर में स्थापित करके श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। माता को आघाड़ा, दूर्वा और फूलों की माला अर्पित करते हैं। अक्षत लेकर माता की पवित्र कथा सुनते और सुनाते हैं।
English Meaning:
When the holy month of Shravan arrives, we bring the idol or image of Mother Jivati into our home and worship Her with devotion. We offer Aghada leaves, sacred Durva grass and garlands to the Goddess. With sacred rice grains, we listen to and narrate Her sacred story.
ध्रुवपद
जयदेवी जयदेवी जय जिवती जननी ।
सुखी ठेवी संतति विनंति तव चरणी ॥ धृ. ॥
हिन्दी अर्थ:
हे जिवती माता, आपकी जय हो। हमारी संतान सदैव सुखी और सुरक्षित रहे—हम आपके चरणों में यही प्रार्थना करते हैं।
English Meaning:
Glory to Mother Jivati. May our children always remain happy, healthy and protected. We offer this prayer at Your feet.
॥ २ ॥
पुरणपोळीचा नैवेद्द दावू ।
सुवासिनींना भोजन देऊ ।
चणे हळददीकुंकू दूधही देऊं ।
जमुनि आनंदे आरती गाऊं ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ:
हम माता को पुरणपोली का नैवेद्य अर्पित करते हैं। सुहागिन महिलाओं को भोजन कराते हैं। उन्हें चने, हल्दी-कुंकुम और दूध आदि प्रसाद के रूप में देते हैं। सभी मिलकर प्रसन्नता और भक्तिभाव से माता की आरती गाते हैं।
English Meaning:
We offer Puran Poli as sacred food to the Goddess. Married women are invited and respectfully served a meal. Chickpeas, turmeric, kumkum and milk are offered as part of the traditional worship. Everyone gathers together and joyfully sings the Aarti of Mother Jivati.
ध्रुवपद
जयदेवी जयदेवी जय जिवती जननी ।
सुखी ठेवी संतति विनंति तव चरणी ॥ धृ. ॥
हिन्दी अर्थ:
हे जिवती जननी, आपकी जय हो। हमारी संतान पर अपनी कृपा बनाए रखें और उन्हें सुखी रखें।
English Meaning:
Glory to Mother Jivati. Please shower Your blessings upon our children and keep them happy and protected.
॥ ३ ॥
सटवीची बाधा होई बाळांना ।
सोडवी तींतून तूंचि तयांना मातां ।
यासाठी तुजला करिती प्रार्थना ।
पूर्ण ही करी मनोकामना ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ:
हे माता! जब बच्चों पर सटवी से संबंधित किसी प्रकार की बाधा या संकट आता है, तब आप ही उन्हें उससे मुक्त करने वाली हैं। इसी विश्वास से भक्त आपकी प्रार्थना करते हैं। हे माता, उनकी शुभ मनोकामनाओं को पूर्ण करें।
English Meaning:
O Mother, according to traditional belief, when children face difficulties associated with Satvi, You are the One who protects and frees them from such troubles. Therefore, devotees pray to You with faith. O Mother, please fulfill their righteous wishes.
ध्रुवपद
जयदेवी जयदेवी जय जिवती जननी ।
सुखी ठेवी संतति विनंति तव चरणी ॥ धृ. ॥
हिन्दी अर्थ:
हे जिवती माता, आपकी जय हो। हमारी संतति को सुखी, स्वस्थ और सुरक्षित रखें।
English Meaning:
Glory to Mother Jivati. Please bless our children with happiness, well-being and protection.
॥ ४ ॥
तुझिया कृपेने सौख्य नांदू दे ।
वंशाचा वेल वाढूं दे ।
सेवा हे व्रत नित्य घडूं दे ।
मनीचे हेतू पूर्ण होऊं दे ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ:
हे माता! आपकी कृपा से हमारे घर में सुख-शांति बनी रहे। हमारा परिवार और वंश निरंतर उन्नति करे। हमें आपकी सेवा और पूजा नियमित रूप से करने का अवसर मिलता रहे। हमारे मन की शुभ इच्छाएँ पूर्ण हों।
English Meaning:
O Mother, by Your grace, may happiness and peace always prevail in our home. May our family and lineage flourish. May we continue to serve and worship You regularly. May our noble wishes be fulfilled.
अंतिम ध्रुवपद
जयदेवी जयदेवी जय जिवती जननी ।
सुखी ठेवी संतति विनंति तव चरणी ॥ धृ. ॥
