पितृ सूक्तम् | Pitru Suktam
पितृ सूक्तम् पूर्वजों को समर्पित वैदिक स्तुति है। इसका पाठ करने से पितरों की कृपा, परिवार में सुख-शांति और वंश की उन्नति प्राप्त होती है।
॥ पितृ सूक्तम् ॥
श्लोक 1
उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुम् यऽ ईयुरवृका ऋतज्ञास्ते नोऽवन्तु पितरो हवेषु ॥१॥
हिंदी अर्थ:
हे सोमरस से तृप्त पितरों! जो नीचले, ऊपरी और मध्यलोक में स्थित हैं, जो निष्कलंक हैं और सत्य को जानने वाले हैं, वे हमारे आह्वान से प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद दें।
English:
O forefathers nourished by Soma, dwelling in the lower, upper, and middle realms—blameless and knowers of truth—may they be pleased with our offerings and bless us.
श्लोक 2
अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।
तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम ॥२॥
हिंदी अर्थ:
हे अंगिरस, नवग्व, अथर्वा और भृगु कुल के पितरों! आप सोमरस से तृप्त हैं। आपकी कृपा से हम उत्तम विचारों वाले और शुभ बुद्धि से युक्त हों।
English:
O forefathers—Angirasas, Navagvas, Atharvans, and Bhrigus—who are pleased with Soma, may we, by your favor, become wise, auspicious, and devoted to sacrifice.
श्लोक 3
ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासोऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।
तेभिर्यमः सरराणो हवीष्य उशन्नुशद्भिः प्रतिकाममत्तु ॥३॥
हिंदी अर्थ:
हमारे पूर्वज वसिष्ठ आदि पितरों ने सोमपान किया था। यमराज उन सबके साथ मिलकर हमारे अर्पित हवि को स्वीकार करें।
English:
Our forefathers, the Vasishthas, once drank Soma. May Yama, together with them, gladly partake of the offerings we present.
श्लोक 4
त्वं सोम प्रचिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठमनु नेषि पंथाम्।
तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नमभजन्त धीराः ॥४॥
हिंदी अर्थ:
हे सोम! तुम अपनी बुद्धि से सबसे श्रेष्ठ मार्ग दिखाते हो। तुम्हारी कृपा से पितरों ने देवताओं के बीच उत्तम रत्न प्राप्त किए।
English:
O Soma, with your wisdom you lead along the highest path. Through your guidance, the forefathers gained precious treasures among the gods.
श्लोक 5
त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।
वन्वन्नवातः परिधीनरपोर्णु वीरेभिरश्वैर्मघवा भवानः ॥५॥
हिंदी अर्थ:
हे पवमान सोम! हमारे पूर्वज धीर पुरुषों ने तुम्हारे द्वारा अनेक कर्म किए। तुम हमें बलवान घोड़ों और पराक्रमी पुरुषों से सम्पन्न करो।
English:
O purified Soma, our wise forefathers performed sacred acts through you. Bestow upon us strength, steeds, and heroic sons.
श्लोक 6
त्वं सोम पितृभिः संविदानोऽनु द्यावा-पृथिवी आततन्थ।
तस्मै त इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥६॥
हिंदी अर्थ:
हे सोम! पितरों के साथ मिलकर तुमने आकाश और पृथ्वी का विस्तार किया। इसलिए हम तुम्हें अर्पण करते हैं और धन-संपत्ति के स्वामी बनें।
English:
O Soma, united with the forefathers, you stretched out heaven and earth. To you we offer oblations, that we may become lords of riches.
श्लोक 7
बर्हिषदः पितर ऊत्यर्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।
त आगतावसा शन्तमे नाथा नः शंयोररपो दधात ॥७॥
हिंदी अर्थ:
हे बर्हिष पर विराजमान पितरों! हमने आपके लिए हवि तैयार किए हैं। कृपया पधारें और हमें सुख तथा कल्याण दें।
English:
O forefathers seated on the sacred grass, we have prepared offerings for you. Come with aid, and grant us welfare and blessings.
श्लोक 8
आहं पितॄन् सुविदत्रानवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।
बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वस्त इहागमिष्ठाः ॥८॥
हिंदी अर्थ:
मैं उन पितरों का आह्वान करता हूँ, जो विष्णु के चरणों के पास बैठते हैं और स्वधा से तृप्त रहते हैं। वे यहाँ आकर हमारे यज्ञ को स्वीकार करें।
English:
I invoke the forefathers, companions of Vishnu’s mighty steps, who delight in Soma with Svadhā. May they come here and partake of our rites.
श्लोक 9
उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।
त आ गमन्तु त इह श्रुवन्त्वधि ब्रुवन्तु तेऽवन्त्वस्मान् ॥९॥
हिंदी अर्थ:
सोमपान करने वाले पितरों को हम बर्हिष पर बुलाते हैं। वे आकर हमारी वाणी सुनें और हमें आशीर्वाद दें।
English:
The Soma-drinking forefathers, invited to the sacred grass, may they come, listen to our call, speak with us, and bless us.
श्लोक 10
आ यन्तु नः पितरः सोम्यासोऽग्निष्वात्ताः पथिभिर्देवयानैः।
अस्मिन्यज्ञे स्वधया मदन्तोऽधि ब्रुवन्तु तेऽवन्त्वस्मान् ॥१०॥
हिंदी अर्थ:
हे सोमपान पितरों और अग्निष्वात्तों! आप देवमार्ग से इस यज्ञ में पधारें, स्वधा से तृप्त हों और हमें आशीर्वाद दें।
English:
Let the Soma-drinking fathers and the Agnishvattas come by the divine paths to this sacrifice, rejoicing in Svadhā, speaking kindly, and blessing us.
श्लोक 11
अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सुप्रणीतयः।
अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्यथा रयिं सर्ववीरं दधातन ॥११॥
हिंदी अर्थ:
हे अग्निष्वात्त पितरों! यहाँ पधारें, हमारे यज्ञ में बैठें और हवि को स्वीकार करें। हमें वीरों और धन से सम्पन्न करें।
English:
Come, O Agnishvatta forefathers! Sit in this assembly, accept our offerings, and grant us wealth and heroic sons.
श्लोक 12
येऽग्निष्वात्ता येऽअनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।
तेभ्यः स्वराडसुनीतिमेतां यथावशं तन्वं कल्पयाति ॥१२॥
हिंदी अर्थ:
जो अग्निष्वात्त और अनग्निष्वात्त पितर स्वधा से तृप्त होते हैं, वे हमारी रक्षा करें और हमारी देह-जीवन को सही मार्ग पर स्थापित करें।
English:
Those forefathers, whether Agnishvattas or not, who delight in Svadhā in the mid-region of heaven, may they guide us and shape our lives rightly.
श्लोक 13
अग्निष्वात्तानृतुमतो हवामहे नाराशंसे सोमपीथं य आषुः।
ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम् ॥१३॥
हिंदी अर्थ:
हे अग्निष्वात्त पितरों! हम आपको बुलाते हैं, जिन्होंने सोम का आस्वादन किया। आप हमारे लिए सुहृद् बनें और हमें धन के स्वामी बनाएं।
English:
We invoke the Agnishvatta forefathers, who swiftly drank Soma. May they be gracious to us, that we may become lords of wealth.
श्लोक 14
आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमं यज्ञमभि गृणीत विश्वे।
मा हिंसिष्ट पितरः केनचिन्नो यद्वागः पुरुषता कराम ॥१४॥
हिंदी अर्थ:
हे सभी पितरों! दक्षिण दिशा में बैठकर हमारे यज्ञ की स्तुति करें। कृपया हमारे किसी अपराध को क्षमा करें।
English:
O forefathers, sit on the right side and praise this sacrifice. Do not harm us for any human errors we may have committed.
श्लोक 15
आसीनासोऽरूणीनामुपस्थे रयं धत्त दाशुषे मर्त्याय।
पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत त इह ऊर्जं दधात ॥१५॥
हिंदी अर्थ:
हे पितरों! अरुण उदयकाल में बैठकर दानशील मनुष्यों को धन और संतान प्रदान करें। उनके पुत्रों को भी आप समृद्धि दें।
English:
Seated at dawn, O forefathers, bestow wealth upon the generous mortal. Grant prosperity also to his sons, and place vigor within them.
समाप्ति
॥ ॐ शांति: शांति: शांति:॥
FAQ
Q1. पितृ सूक्तम् का पाठ कब करना चाहिए? पितृ पक्ष, अमावस्या और श्राद्ध के दिनों में पितृ सूक्तम् का पाठ करना शुभ माना जाता है।
Q2. पितृ सूक्तम् का पाठ करने से क्या लाभ होता है? इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।
Q3. पितृ सूक्तम् किस वेद में वर्णित है? पितृ सूक्तम् ऋग्वेद में वर्णित है।
Q4. क्या पितृ सूक्तम् का अर्थ समझकर पाठ करना ज़रूरी है? हाँ, अर्थ समझकर श्रद्धा से पाठ करने पर अधिक फल मिलता है।
