कल्याणकारी मंगल स्तोत्र / मनोरथाष्टकम्

“कल्याणकारी मंगल स्तोत्र” जिसे मनोरथाष्टकम् भी कहा जाता है, एक अत्यंत शुभ व मंगलकारी स्तोत्र है, जिसकी रचना महर्षि व्यास ने की थी। इसके पाठ से जीवन में सौभाग्य, समृद्धि, और सभी मनोरथों की सिद्धि होती है। विशेष रूप से विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा, और किसी भी शुभारंभ के समय इसका पाठ अत्यंत फलदायी है।

श्लोक 1

गणाधिपो भानु-शशी-धरासुतो बुधो गुरुर्भार्गवसूर्यनन्दनाः ।
राहुश्च केतुश्च परं नवग्रहाः कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥

भावार्थ:
गणों के अधिपति गणेश, सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु (बृहस्पति), भार्गव (शुक्र), सूर्यनन्दन (राहु), एवं केतु—यह सभी नवग्रह आपके सभी मनोरथों की पूर्णता करें।

श्लोक 2

उपेन्द्र इन्द्रो वरुणो हुताशनस्त्रिविक्रमो भानुसखश्चतुर्भुजः ।
गन्धर्व-यक्षोरग-सिद्ध-चारणाः कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥

भावार्थ:
उपेन्द्र, इन्द्र, वरुण, अग्नि (हुताशन), त्रिविक्रम, सूर्य के मित्र, चतुर्भुज भगवान, गंधर्व-यक्ष-नाग-सिद्ध-चारण—यह सब आपके मनोरथों को उत्तम रूप से पूर्ण करें।

श्लोक 3

नलो दधीचिः सगरः पुरूरवा शाकुन्तलेयो भरतो धनञ्जयः ।
रामत्रयं वैन्यबली युधिष्ठिरः कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥

भावार्थ:
मंगल के पक्षधर नल, दधीचि, सगर, पुरूरवा, शकुन्तला के पुत्र भरत, धनंजय (अर्जुन), तीन राम (राम, लक्ष्मण, भरत) तथा वैन्य, बलराम, युधिष्ठिर—ये सभी आपके मनोरथों को सादर पूर्ण करें।

श्लोक 4

मनु-र्मरीचि-र्भृगु-दक्ष-नारदाः पाराशरो व्यास-वसिष्ठ-भार्गवाः । वाल्मीकि-कुम्भोद्भव-गर्ग-गौतमाः कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥४॥

भावार्थ:
मनु, मरीचि, भृगु, दक्ष, नारद, पाराशर, व्यास, वशिष्ठ, भार्गव, वाल्मीकि, समुद्र से उत्पन्न अगस्त्य, गर्ग, गौतम – ये सभी महर्षि सदा आपके मनोरथ पूरे करें।

श्लोक 5


रम्भाशची सत्यवती च देवकी गौरी च लक्ष्मीश्च दितिश्च रुक्मिणी । कूर्मो गजेन्द्रः सचराऽचरा धरा कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥५॥

भावार्थ:
रंभा, शची, सत्यवती, देवकी, गौरी, लक्ष्मी, दिति और रुक्मिणी – ये सभी देवियाँ, साथ ही कूर्म (कच्छप), गजेन्द्र, चल-अचल धरती – ये सब आपके मनोरथ पूरे करें।

श्लोक 6


गङ्गा च क्षिप्रा यमुना सरस्वती गोदावरी नेत्रवती च नर्मदा । सा चन्द्रभागा वरुणा त्वसी नदी कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥६॥

भावार्थ:
गंगा, क्षिप्रा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नेत्रवती, नर्मदा, चन्द्रभागा, वरुणा, त्वसी नदी – ये सभी पवित्र नदियाँ आपके मनोरथ पूरे करें।

श्लोक 7


तुङ्ग-प्रभासो गुरुचक्रपुष्करं गया विमुक्ता बदरी वटेश्वरः । केदार-पम्पासरसश्च नैमिषं कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥७॥

भावार्थ:

तुङ्ग, प्रभास, गुरुचक्र, पुष्कर, गया, विमुक्ता, बदरी, वटेश्वर, केदार, पम्पा सरोवर और नैमिषारण्य – ये सभी तीर्थ आपके मनोरथ पूरे करें।

 

श्लोक 8

शङ्खश्च दूर्वासित-पत्र-चामरं मणि प्रदीपो वररत्नकाञ्चनम् । सम्पूर्णकुम्भः सुहृतो हुताशनः कुर्वन्तु वः पूर्णमनोरथं सदा ॥८॥

भावार्थ:
शंख, दूर्वा, हरे पत्ते, चामर, रत्नजटित दीपक, श्रेष्ठ मणि, स्वर्ण अलंकरण, पूर्ण कलश, प्रिय मित्र और अग्नि – ये सभी आपके मनोरथ पूरे करें।

श्लोक 9

प्रयाणकाले यदि वा सुमङ्गले प्रभातकाले च नृपाभिषेचने । धर्मार्थकामाय जयाय भाषित व्यासेन कुर्यात्तु मनोरथं हि तत् ॥९॥

भावार्थ:
यदि यह स्तोत्र शुभ अवसरों पर, जैसे यात्रा के समय, विवाह या राजाभिषेक के समय, अथवा प्रातःकाल में धर्म, अर्थ, काम और विजय की इच्छा से, व्यासजी द्वारा रचित यह मंगल स्तोत्र पढ़ा जाए – तो यह निश्चित ही सभी मनोरथ पूरे करता है।

॥ इति व्यासकृतं मङ्गलस्तोत्रं समाप्तम् ॥

Importance (महत्व संक्षेप में)
सभी देवताओं, ऋषियों, नदियों और तीर्थों का आह्वान — जिससे संपूर्ण सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मनोरथ सिद्धि — जीवन की इच्छाओं की पूर्ति एवं सफलता के मार्ग में आने वाली बाधाओं का निवारण। शुभ समय पर प्रभाव — विवाह, यात्रा, व्यवसाय, या नए कार्य के आरंभ से पहले इसका पाठ करने से मंगल फल प्राप्त होते हैं। मनोरथ सिद्धि — जीवन की इच्छाओं की पूर्ति एवं सफलता के मार्ग में आने वाली बाधाओं का निवारण। शुभ समय पर प्रभाव — विवाह, यात्रा, व्यवसाय, या नए कार्य के आरंभ से पहले इसका पाठ करने से मंगल फल प्राप्त होते हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. कल्याणकारी मंगल स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?
सुबह के समय, विवाह, गृहप्रवेश, यात्रा या किसी भी शुभ अवसर से पहले पाठ करें।

Q2. इसका पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
यह जीवन में सौभाग्य, सफलता और सभी मनोरथों की सिद्धि में सहायक है।

Q3. क्या इसे किसी विशेष विधि से पढ़ना चाहिए?
शुद्ध मन, स्वच्छ स्थान, और ध्यानपूर्वक उच्चारण के साथ पढ़ना उत्तम है।

Q4. क्या यह स्तोत्र किसी विशेष देवी-देवता को समर्पित है?
यह सर्वदेव एवं तीर्थों की स्तुति करता है, जिससे सभी शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।