श्री हनुमान् मङ्गलाष्टकम् | संकट नाशक हनुमान मंगल स्तोत्र | Hanuman Mangala Ashtakam

Audio / Video

श्री हनुमान् मङ्गलाष्टकम् भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली मंगल स्तोत्र है। यह स्तोत्र विशेष रूप से संकट, भय, नकारात्मक ऊर्जा, शत्रु बाधा और मानसिक अशांति को दूर करने में सहायक माना गया है। मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ अत्यंत फलदायी होता है।

श्री हनुमान् मङ्गलाष्टकम्

Add Your Heading Text Here

🔸 श्लोक 1

वैशाखे मासि कृष्णायां दशम्यां मन्दवासरे।
पूर्वाभाद्रप्रभूताय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ:
वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि, शनिवार के दिन, पूर्वाभाद्र नक्षत्र में प्रकट हुए श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, who manifested on the tenth day of the dark fortnight of Vaishakha month, on a Saturday, under the Purva Bhadrapada constellation.


🔸 श्लोक 2

करुणारसपूर्णाय फलापूपप्रियाय च ।
माणिक्यहारकण्ठाय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ:
जो करुणा से परिपूर्ण हैं, फलों और अपूप (मिठाई) को प्रिय मानते हैं तथा जिनके कंठ में माणिक्य हार शोभित है—ऐसे श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, filled with compassion, fond of fruits and sweets, and adorned with a ruby necklace.


🔸 श्लोक 3

सुवर्चलाकलत्राय चतुर्भुजधराय च ।
उष्ट्रारूढाय वीराय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ:
जिनकी पत्नी सुवर्चला हैं, जो चार भुजाओं से युक्त हैं और ऊँट पर आरूढ़ वीर स्वरूप हैं—ऐसे श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, consort of Suvarchala, the four-armed hero, who rides a camel.


🔸 श्लोक 4

दिव्यमङ्गलदेहाय पीताम्बरधराय च ।
तप्तकाञ्चनवर्णाय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ:
दिव्य और मंगलमय शरीर वाले, पीत वस्त्र धारण करने वाले तथा तप्त स्वर्ण के समान कांतिमान श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, whose body is divine and radiant, clothed in yellow garments, glowing like molten gold.


🔸 श्लोक 5

भक्तरक्षणशीलाय जानकीशोकहारिणे ।
ज्वलत्पावकनेत्राय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ:
भक्तों की रक्षा करने वाले, माता सीता के शोक को हरने वाले तथा अग्नि के समान तेजस्वी नेत्रों वाले श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, protector of devotees, remover of Sita’s sorrow, whose eyes blaze like fire.


🔸 श्लोक 6

पम्पातीरविहाराय सौमित्रिप्राणदायिने ।
सृष्टिकारणभूताय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ:
पम्पा सरोवर के तट पर विहार करने वाले, लक्ष्मण को जीवन देने वाले तथा सृष्टि के कारण स्वरूप श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, who roams the banks of Lake Pampa, who restored life to Lakshmana, and who is a cause of creation.


🔸 श्लोक 7

रम्भावनविहाराय गन्धमादनवासिने ।
सर्वलोकैकनाथाय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ:
रम्भावन में विचरण करने वाले, गंधमादन पर्वत पर निवास करने वाले और तीनों लोकों के एकमात्र स्वामी श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, who wanders in divine forests, dwells on Mount Gandhamadana, and is the supreme lord of all worlds.


🔸 श्लोक 8

पञ्चाननाय भीमाय कालनेमिहराय च ।
कौण्डिन्यगोत्रजाताय मङ्गलं श्रीहनूमते ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ:
पाँच मुखों वाले, अत्यंत भयानक स्वरूपधारी, कालनेमि का संहार करने वाले तथा कौण्डिन्य गोत्र में उत्पन्न श्री हनुमान जी को मंगल हो।

English Meaning:
Auspiciousness to Lord Hanuman, the five-faced, mighty one, destroyer of Kalanemi, born in the Kaundinya lineage.


🌺 फलश्रुति (Essence)

इस हनुमान मङ्गलाष्टकम् के नियमित पाठ से
➡️ संकट, भय, रोग, शत्रु बाधा नष्ट होती है
➡️ बल, बुद्धि, साहस और मंगल की प्राप्ति होती है

हनुमान मङ्गलाष्टकम् पाठ के लाभ (Labh)

  • 🔸 जीवन के सभी संकटों का नाश

  • 🔸 भय, भूत-प्रेत एवं नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

  • 🔸 शारीरिक बल, मानसिक साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि

  • 🔸 शत्रु, कोर्ट-कचहरी एवं बाधाओं से मुक्ति

  • 🔸 मंगल दोष एवं ग्रह बाधा शमन में सहायक

  • 🔸 हनुमान जी की विशेष कृपा और सुरक्षा कवच

Frequently Asked Questions (FAQ)

1️⃣ श्री हनुमान मङ्गलाष्टकम् क्या है?

यह भगवान हनुमान का एक मंगलकारी एवं संकट नाशक स्तोत्र है, जो भक्तों को भय, बाधा और कष्टों से मुक्त करता है।

2️⃣ हनुमान मङ्गलाष्टकम् का पाठ कब करें?

इसका पाठ मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती या संकट के समय विशेष फल देता है।

3️⃣ क्या इस स्तोत्र से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं?

हाँ, यह स्तोत्र भूत-प्रेत, भय, नज़र दोष और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।

4️⃣ कितनी बार पाठ करना चाहिए?

नित्य एक बार या 11 / 21 बार पाठ करने से शीघ्र फल प्राप्त होता है।

5️⃣ क्या यह स्तोत्र गृहस्थ भी पढ़ सकते हैं?

हाँ, यह स्तोत्र सभी आयु और वर्ग के भक्त पढ़ सकते हैं।