दशावतार स्तोत्रम् | Dashavatara Stotram
दशावतार स्तोत्रम् भगवान विष्णु के दस अवतारों का वर्णन करता है। यह स्तोत्र भक्तों को धर्मपालन, शक्ति, संकटमोचन और मोक्ष की दिशा में प्रेरित करता है।
दशावतार स्तोत्र (श्री वादिराजतीर्थ विरचित)
श्लोक एवं हिंदी अर्थ
1.
श्लोक:
नमोस्तु नारायणमन्दिराय नमोस्तु हरयाणकमधारय ।
नमोस्तु परायणचर्चिताय नमोस्तु नारायण तेरचिताय ॥ 1 ॥
अर्थ:
उन नारायण भगवान को बारंबार नमस्कार है, जो समस्त जीवों का धाम हैं,
जो हरि के रूप में संसार का पालन करते हैं,
जो साधकों के लिए परम आश्रय हैं,
और जिनकी भक्ति से सभी दुःख दूर हो जाते हैं।
2.
श्लोक:
नमोस्तु मत्स्याय लयब्धिगाय नमोस्तु कूर्माय पयोब्धिगाय ।
नमो वाराहाय धराधराय नमो नृसिंहाय परत्पराय ॥ 2 ॥
अर्थ:
नमस्कार है मत्स्य अवतार को जिन्होंने प्रलय में वेदों की रक्षा की,
कूर्म अवतार को जिन्होंने समुद्र मंथन में पर्वत को संभाला,
वाराह अवतार को जिन्होंने पृथ्वी को समुद्र से निकाला,
और नृसिंह अवतार को जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए प्रकट हुए।
3.
श्लोक:
नमोस्तु सक्रस्राय वामनाय नमोस्तु विप्रोत्सव भार्गवाय ।
नमोस्तु सीताहित राघवाय नमोस्तु पार्थस्तुत यादवाय ॥ 3 ॥
अर्थ:
नमस्कार है वामन अवतार को जिन्होंने बलि को तीन पगों में पृथ्वी-स्वर्ग नाप लिया,
परशुराम अवतार को जिन्होंने अत्याचारियों का संहार किया,
राम अवतार को जिन्होंने सीता जी की रक्षा की,
और कृष्ण अवतार को जिन्हें अर्जुन ने गीता में स्तुति की।
4.
श्लोक:
नमोस्तु बुद्धाय विमोहकाय नमोस्तु ते कल्कि पादोदिताय ।
नमोस्तु पूर्णामितसद्गुणाय नमोस्तु नाथाय हयाननाय ॥ 4 ॥
अर्थ:
नमस्कार है बुद्ध अवतार को जिन्होंने अधार्मिक लोगों को मोहित कर अधर्म का नाश किया,
कल्कि अवतार को जो अंत समय में अधर्मियों का संहार करेंगे,
और हयग्रीव (हयानन) भगवान को जो अनंत ज्ञान और सद्गुणों से पूर्ण हैं।
5.
श्लोक:
करस्थ संकोल्लसदक्षमालाप्रबोधमुद्रा बयपुस्तकया ।
नमोस्तु वक्त्रोद्गिराद्गमाय नष्टयेया हयाननाय ॥ 5 ॥
अर्थ:
हयग्रीव भगवान को नमस्कार है, जिनके हाथ में जपमाला और पुस्तक शोभा पाते हैं,
जिनके मुख से वेदों का उद्गार होता है,
और जो अज्ञान को नष्ट करते हैं।
6.
श्लोक:
रामसमाकार चतुष्टयेन क्रमाचतुर्दिक्षु निशेविताय ।
नमोऽस्तु पार्श्वविगद्विरूपस्रिय बिशिकताय हयाननाय ॥ 6 ॥
अर्थ:
चार मुखों वाले हयग्रीव को नमस्कार है, जिनकी रूप-सुंदरता सभी दिशाओं में व्याप्त है,
जिनकी अनुपम शोभा से संपूर्ण जगत आलोकित है।
7.
श्लोक:
किरीटपट्टं गदाहारकमचिसुरत्नापीताम्बरा नुपुरद्यैः ।
विराजितांगाय नमोस्तु तुभ्यं सुरैः परिताय हयाननाय ॥ 7 ॥
अर्थ:
स्वर्णमुकुट, गदा, रत्नों से जड़ित आभूषण, पीताम्बर और नूपुर धारण किए हुए
उस हयग्रीव भगवान को नमस्कार है, जिनके चारों ओर देवता स्तुति कर रहे हैं।
8.
श्लोक:
विदोषकोटिमदुनिबाप्रभया विशेषतो माधवमुनिप्रियाय ।
विमुक्तवामद्याय नमोस्तु विश्वग्विधुतविघ्नय हयाननाय ॥ 8 ॥
अर्थ:
करोड़ों सूर्यों की भांति ज्योतिर्मय हयग्रीव को नमस्कार है,
जो माधव मुनि के प्रिय हैं,
जिनके स्मरण मात्र से विघ्न दूर हो जाते हैं।
9.
श्लोक:
नमोऽस्तु शिष्टेष्टदवादिराजकृताष्टकाभिष्टुत चेष्टिताय ।
दशावतारैस्त्रिदसारथ दाय निसेसाबिंबस्थ हयाननाय ॥ 9 ॥
अर्थ:
उन हयग्रीव भगवान को बारंबार नमस्कार है,
जिनकी स्तुति श्रेष्ठ जनों और राजाओं ने की है,
जो दशावतारों के स्वामी हैं,
और जिनकी लीला से संपूर्ण सृष्टि आलोकित है।
📖 भावार्थ सारांश:
इस स्तोत्र में भगवान विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि और हयग्रीव रूपों की स्तुति की गई है। इनकी उपासना से ज्ञान, धर्म, बल, शांति और संकटमोचन कृपा प्राप्त होती है।
FAQs (Frequently Asked Questions)
Q1. दशावतार स्तोत्रम् किसके द्वारा रचित है?
👉 दशावतार स्तोत्रम् आदि शंकराचार्य द्वारा रचित माना जाता है।
Q2. दशावतार स्तोत्रम् का पाठ कब करना चाहिए?
👉 इसे प्रातःकाल या संध्याकाल में विष्णु पूजा के समय पढ़ना श्रेष्ठ माना जाता है।
Q3. दशावतार स्तोत्रम् का पाठ करने से क्या फल मिलता है?
👉 इस स्तोत्र के पाठ से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है, पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
Q4. क्या दशावतार स्तोत्रम् रोज़ पढ़ सकते हैं?
👉 हाँ, इसे रोज़ पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
