गुप्त नवरात्रि विशेष | दशमहाविद्या कवचम् | वसंत पंचमी पावन साधना | Dash Mahavidya Kavacham

दशमहाविद्या कवचम् गुप्त नवरात्रि एवं वसंत पंचमी की दिव्य साधना हेतु अत्यंत प्रभावशाली रक्षा स्तोत्र है। इसके पाठ से नकारात्मक शक्तियों से संरक्षण एवं सिद्धि प्राप्त होती है।

श्री दशमहाविद्या कवचम्

 

॥ ॐ गण गणपतये नमः ॥

॥ विनियोगः ॥

ॐ अस्य श्रीमहाविद्याकवचस्य श्रीसदाशिव ऋषिः उष्णिक् छन्दः
श्रीमहाविद्या देवता सर्वसिद्धीप्राप्त्यर्थे पाठे विनियोगः ।

॥ ऋष्यादि न्यासः ॥

श्रीसदाशिवऋषये नमः शिरसी उष्णिक् छन्दसे नमः मुखे
श्रीमहाविद्यादेवतायै नमः हृदि सर्वसिद्धिप्राप्त्यर्थे
पाठे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।

॥ मानसपुजनम् ॥

ॐ पृथ्वीतत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमहाविद्याप्रीत्यर्थे समर्पयामि नमः ।
ॐ हं आकाशतत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमहाविद्याप्रीत्यर्थे समर्पयामि नमः ।
ॐ यं वायुतत्त्वात्मकं धूपं श्रीमहाविद्याप्रीत्यर्थे आघ्रापयामि नमः ।
ॐ रं अग्नितत्त्वात्मकं दीपं श्रीमहाविद्याप्रीत्यर्थे दर्शयामि नमः ।
ॐ वं जलतत्त्वात्मकं नैवेद्यं श्रीमहाविद्याप्रीत्यर्थे निवेदयामि नमः ।
ॐ सं सर्वतत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमहाविद्याप्रीत्यर्थे निवेदयामि नमः।

॥ अथ श्री महाविद्याकवचम् ॥

ॐ प्राच्यां रक्षतु मे तारा कामरूपनिवासिनी ।
आग्नेय्यां षोडशी पातु याम्यां धूमावती स्वयम् ॥ १॥
नैरृत्यां भैरवी पातु वारुण्यां भुवनेश्वरी ।
वायव्यां सततं पातु छिन्नमस्ता महेश्वरी ॥ २॥

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कौबेर्यां पातु मे देवी श्रीविद्या बगलामुखी ।
ऐशान्यां पातु मे नित्यं महात्रिपुरसुन्दरी ॥ ३॥
ऊर्ध्वं रक्षतु मे विद्या मातङ्गीपीठवासिनी ।
सर्वतः पातु मे नित्यं कामाख्या कालिका स्वयम् ॥ ४॥

ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्वविद्यामयी स्वयम् ।
शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा भालं श्रीभवगेहिनी ॥ ५॥
त्रिपुरा भ्रुयुगे पातु शर्वाणी पातु नासिकाम् ।
चक्षुषी चण्डिका पातु श्रोत्रे निलसरस्वती ॥ ६॥

मुखं सौम्यमुखी पातु ग्रीवां रक्षतु पार्वती ।
जिह्वां रक्षतु मे देवी जिह्वाललनभीषणा ॥ ७॥
वाग्देवी वदनं पातु वक्षः पातु महेश्वरी ।
बाहू महाभुजा पातु कराङ्गुलीः सुरेश्वरी ॥ ८॥

पृष्ठतः पातु भीमास्या कट्यां देवी दिगम्बरी ।
उदरं पातु मे नित्यं महाविद्या महोदरी ॥ ९॥
उग्रतारा महादेवी जङ्घोरू परिरक्षतु । 
उग्रातारा गुदं मुष्कं च मेढ्रं च नाभिं च सुरसुन्दरी ॥ १०॥

पादाङ्गुलीः सदा पातु भवानी त्रिदशेश्वरी ।
रक्तमांसास्थिमज्जादीन् पातु देवी शवासना ॥ ११॥
महाभयेषु घोरेषु महाभयनिवारिणी ।
पातु देवी महामाया कामाख्यापीठवासिनी ॥ १२॥

भस्माचलगता दिव्यसिंहासनकृताश्रया ।
पातु श्रीकालिकादेवी सर्वोत्पातेषु सर्वदा ॥ १३॥
रक्षाहीनं तु यत्स्थानं कवचेनापि वर्जितम् ।
तत्सर्वं सर्वदा पातु सर्वरक्षणकारिणी ॥ १४॥ 

॥ इति श्री दश महाविद्या कवचम् सम्पूर्णम ॥

🌺 लाभ (Benefits of Dash Mahavidya Kavacham)

  • नकारात्मक ऊर्जा, भय एवं बाधाओं से पूर्ण रक्षा

  • गुप्त नवरात्रि साधना में विशेष फलदायी

  • माँ काली से माँ कमला तक सभी महाविद्याओं की कृपा

  • तंत्र-मंत्र, भय, ग्रह बाधा एवं शत्रु दोष से संरक्षण

  • साधक में आत्मबल, तेज और आध्यात्मिक उन्नति

  • वसंत पंचमी पर विद्या, बुद्धि और वाणी की सिद्धि

❓ FAQ Q1.

दशमहाविद्या कवचम् क्या है?
यह माँ काली से माँ कमला तक दसों महाविद्याओं की संयुक्त रक्षा स्तुति है।

Q2. इसका पाठ कब करना श्रेष्ठ माना गया है?
गुप्त नवरात्रि, वसंत पंचमी, अमावस्या एवं साधना काल में।

Q3. क्या सामान्य भक्त इसका पाठ कर सकते हैं?
हाँ, शुद्ध भाव और श्रद्धा से कोई भी भक्त इसका पाठ कर सकता है।

Q4. क्या यह कवच तांत्रिक बाधाओं से रक्षा करता है?
हाँ, इसे विशेष रूप से रक्षा एवं सुरक्षा कवच माना गया है।

Q5. कितनी बार पाठ करना चाहिए?
नित्य एक बार या गुप्त नवरात्रि में 9 या 11 बार पाठ उत्तम माना जाता है।