॥ श्री भैरव स्तवः ॥ | काल भैरव कृपा से भय, संकट एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश
श्री भैरव स्तवः भगवान काल भैरव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तुति है। इसका नियमित पाठ करने से भय दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और साधक को सुरक्षा, साहस तथा आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
॥ श्री भैरवस्तवः ॥
(अभिनवगुप्ताचार्य कृत)
🔹 श्लोक १
व्याप्तचराचरभावविशेषं चिन्मयमेकमनन्तमनादिम् ।
भैरवनाथमनाथशरण्यं त्वन्मयचित्ततया हृदि वन्दे ॥ १॥
👉 हिन्दी अर्थ:
हे भैरवनाथ! आप सम्पूर्ण चर-अचर जगत में व्याप्त, चेतन स्वरूप, अनन्त और आदि रहित हैं। आप अनाथों के भी शरणदाता हैं। मैं अपने चित्त को आपमें लीन करके हृदय से आपकी वन्दना करता हूँ।
👉 English Meaning:
O Lord Bhairava! You pervade all moving and non-moving existence, embodying pure consciousness, infinite and beginningless. You are the refuge of the helpless. I bow to You with a mind absorbed in Your essence.
🔹 श्लोक २
त्वन्मयमेतदशेषमिदानीं भाति मम त्वदनुग्रहशक्त्या ।
त्वं च महेश सदैव ममात्मा स्वात्ममयं मम तेन समस्तम् ॥ २॥
👉 हिन्दी अर्थ:
आपकी कृपा से अब मुझे सम्पूर्ण जगत आपसे ही परिपूर्ण दिखाई देता है। हे महेश! आप ही मेरे आत्मा हैं और सब कुछ आपका ही स्वरूप है।
👉 English Meaning:
By Your grace, I now perceive everything as filled with You. O Mahesh, You are my very Self, and thus everything is pervaded by Your essence.
🔹 श्लोक ३
स्वात्मनि विश्वगते त्वयि नाथे तेन न संसृतिभीतिकथास्ति ।
सत्स्वपि दुर्धरदुःखविमोहत्रासविधायिषु कर्मगणेषु ॥ ३॥
👉 हिन्दी अर्थ:
हे नाथ! जब आप ही सम्पूर्ण विश्व में और मेरे आत्मा में स्थित हैं, तब जन्म-मरण का भय नहीं रहता, चाहे कठिन दुःख और मोह उत्पन्न करने वाले कर्म क्यों न हों।
👉 English Meaning:
O Lord! When You reside in all and within my own Self, there remains no fear of worldly existence, even amidst actions causing suffering, delusion, and fear.
🔹 श्लोक ४
अन्तक मां प्रति मा दृशमेनां क्रोधकरालतमां विनिधेहि ।
शङ्करसेवनचिन्तनधीरो भीषणभैरवशक्तिमयोऽस्मि ॥ ४॥
👉 हिन्दी अर्थ:
हे मृत्यु के स्वामी! मुझ पर अपना भयंकर क्रोध न करें। मैं शंकर की सेवा और ध्यान में स्थिर हूँ तथा भैरव की शक्ति से युक्त हूँ।
👉 English Meaning:
O Lord of Death! Do not cast your terrifying wrath upon me. I am steadfast in the contemplation and service of Shankara and filled with Bhairava’s power.
🔹 श्लोक ५
इत्थमुपोढभवन्मयसंविद्दीधितिदारितभूरितमिस्रः ।
मृत्युयमान्तककर्मपिशाचैर्नाथ नमोऽस्तु न जातु बिभेमि ॥ ५॥
👉 हिन्दी अर्थ:
आपकी चेतना के प्रकाश से मेरा अज्ञान दूर हो गया है। अब मृत्यु, यमराज या अन्य भय उत्पन्न करने वाली शक्तियों से मुझे कोई भय नहीं है।
👉 English Meaning:
Illuminated by Your consciousness, my ignorance is dispelled. O Lord, I no longer fear death, Yama, or any terrifying forces.
🔹 श्लोक ६
प्रोदितसत्यविबोधमरीचिः प्रेक्षितविश्वपदार्थसतत्त्वः ।
भावपरामृतनिर्भरपूर्णे त्वय्यहमात्मनि निर्वृतिमेमि ॥ ६॥
👉 हिन्दी अर्थ:
सत्य ज्ञान के प्रकाश से मैं जगत के वास्तविक स्वरूप को देख पाता हूँ और आपमें पूर्ण आनंद और शांति प्राप्त करता हूँ।
👉 English Meaning:
Through the light of true knowledge, I perceive the essence of all existence and attain blissful peace in You, who are filled with divine nectar.
🔹 श्लोक ७
मानसगोचरमेति यदैव क्लेशदशा तनुतापविधात्री ।
नाथ तदैव मम त्वदभेदस्तोत्रपरामृतवृष्टिरुदेति ॥ ७॥
👉 हिन्दी अर्थ:
जब भी दुःख और कष्ट मन में आते हैं, उसी समय आपके अभेद स्तोत्र का अमृत मेरे ऊपर वर्षा करता है और शांति देता है।
👉 English Meaning:
Whenever suffering arises in my mind, the nectar-like flow of Your non-dual praise showers upon me, bringing peace and relief.
🔹 श्लोक ८
शङ्कर सत्यमिदं व्रतदानस्नानतपो भवतापविदारि ।
तावकशास्त्रपरामृतचिन्ता स्यन्दति चेतसि निर्वृतिधाराम् ॥ ८॥
👉 हिन्दी अर्थ:
हे शंकर! व्रत, दान, स्नान और तप सभी संसार के दुःख को दूर करते हैं, परंतु आपके ज्ञान और चिंतन से मन में सच्ची शांति प्राप्त होती है।
👉 English Meaning:
O Shankara! Though vows, charity, and austerities remove worldly suffering, true peace flows in the mind through contemplation of Your divine knowledge.
🔹 श्लोक ९
नृत्यति गायति हृष्यति गाढं संविदियं मम भैरवनाथ ।
त्वां प्रियमाप्य सुदर्शनमेकं दुर्लभमन्यजनैः समयज्ञम् ॥ ९॥
👉 हिन्दी अर्थ:
हे भैरवनाथ! आपको प्राप्त करके मेरी चेतना आनंद से नृत्य और गान करती है। आपका साक्षात्कार अत्यंत दुर्लभ है, जिसे केवल ज्ञानी ही प्राप्त करते हैं।
👉 English Meaning:
O Bhairava! Upon attaining You, my consciousness rejoices, dances, and sings. Your realization is rare and attained only by the wise.
🔹 श्लोक १०
(पौषरसाष्टगकृष्णदशम्यामभिनवगुप्तः स्तवमिमकरोत् ।
येन विभुर्भवमरुसन्तापं नाशयति स्वजनस्य झटिति दयालुः ॥ १०॥)
👉 हिन्दी अर्थ:
अभिनवगुप्ताचार्य ने इस स्तोत्र की रचना की है, जिसके पाठ से भगवान शीघ्र ही भक्तों के संसारिक कष्टों को दूर कर देते हैं।
👉 English Meaning:
This hymn was composed by Abhinavagupta. By reciting it, the compassionate Lord quickly removes the worldly sufferings of His devotees.
🔱 निष्कर्ष
यह भैरव स्तव अत्यंत शक्तिशाली स्तुति है, जो साधक को भय, मृत्यु, नकारात्मक ऊर्जा और मोह से मुक्त कर आत्मज्ञान एवं शांति प्रदान करता है।
🔷 🌼 श्री भैरव स्तवः के लाभ (Labh)
- 🛡️ भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा
- ⚔️ शत्रु बाधा और संकटों का नाश
- 🔥 आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि
- 🧘 मानसिक शांति और स्थिरता प्राप्त
- 🕉️ तंत्र बाधाओं और दोषों से मुक्ति
- 🚪 जीवन में सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह
🔷 ❓ FAQ (Content)
1. श्री भैरव स्तवः क्या है?
यह भगवान काल भैरव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तुति है जो भय और संकटों को दूर करने के लिए पढ़ी जाती है।
2. भैरव स्तवः कब पढ़ना चाहिए?
इसे प्रतिदिन या विशेष रूप से रविवार, मंगलवार और भैरव अष्टमी के दिन पढ़ना शुभ माना जाता है।
3. क्या भैरव स्तोत्र से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं?
हाँ, इसका नियमित पाठ नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियों से रक्षा करता है।
4. भैरव स्तवः के क्या लाभ हैं?
यह साहस, सुरक्षा, मानसिक शांति और शत्रु बाधा से मुक्ति प्रदान करता है।
