Aditya Hridaya Stotra | आदित्यहृदय स्तोत्र (Sanskrit Lyrics) | Powerful Surya Dev Stotra

आदित्यहृदय स्तोत्र सूर्यदेव की कृपा प्राप्त करने वाला अत्यंत प्रभावी स्तोत्र है। इसका पाठ मन की शांति, आरोग्य, तेज और सफलता प्रदान करता है। यहाँ संस्कृत पाठ, अर्थ, लाभ व FAQ उपलब्ध हैं।

 

आदित्यहृदय स्तोत्र (पूर्ण पाठ)

(Viniyog + Complete Sanskrit Lyrics)


🔶 विनियोग (Viniyog)

ॐ अस्य आदित्यहृदय स्तोत्रस्य अगस्त्यऋषिः, अनुष्टुप्छन्दः, आदित्यहृदयभूतो भगवान् ब्रह्मा देवता।
निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्माविद्यासिद्धौ, सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः।


🔶 ध्यान / प्रार्थना

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।


🌞 आदित्यहृदय स्तोत्र – पूर्ण श्लोक

1

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥१॥

2

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा॥२॥

3

राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्।
येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे॥३॥

4

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्॥४॥

5

सर्वमंगलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्।
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्॥५॥


🌞 मूल-स्तोत्र (Main Stotram)

6

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्।
पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥६॥

7

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः।
एष देवासुरगणांल्लोकान् पाति गभस्तिभिः॥७॥

8

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः।
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः॥८॥

9

पितरो वसवः साध्या अश्विनौ मरुतो मनुः।
वायुर्वह्निः प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः॥९॥

10

आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्।
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकरः॥१०॥

11

हरिदश्वः सहस्त्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान्।
तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोऽंशुमान्॥११॥

12

हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनोरस्करो रविः।
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शंखः शिशिरनाशनः॥१२॥

13

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः॥१३॥

14

आतपी मण्डली मृत्युर्पिंगलः सर्वतापनः।
कविर्विश्वो महातेजाः रक्तः सर्वभवोद्भवः॥१४॥

15

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते॥१५॥

16

नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥१६॥

17

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः।
नमो नमः सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नमः॥१७॥

18

नमोऽग्राय वीराय सारंगाय नमो नमः।
नमः पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते॥१८॥

19

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे।
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः॥१९॥

20

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः॥२०॥

21

तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे।
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे॥२१॥

22

नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभुः।
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः॥२२॥

23

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः।
एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्॥२३॥

24

देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च।
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभुः॥२४॥

25

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च।
कीर्तयन् पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव॥२५॥

26

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम्।
एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि॥২৬॥

27

अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि।
एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्॥२७॥

28

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्तदा।
धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान्॥२८॥

29

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्।
त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्॥२९॥

30

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्।
सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्॥३०॥

31

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमनाः परमं प्रहृष्यमाणः।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति॥३१॥

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🌞 आदित्यहृदय स्तोत्र — हिंदी अर्थ (Hindi Meaning)


1

ततो युद्धपरिश्रान्तं…
अर्थ: युद्ध से थके हुए श्रीराम रावण को सामने खड़ा देखकर चिंतित हो रहे थे।

2

दैवतैश्च समागम्य…
अर्थ: देवताओं ने युद्ध देखने की इच्छा से वहाँ आगमन किया। उसी समय अगस्त्य ऋषि राम के पास आए।

3

राम राम महाबाहो…
अर्थ: ऋषि बोले— हे महाबाहु राम! इस सनातन रहस्य को सुनिए, इससे आप सभी शत्रुओं पर विजय पाएँगे।

4

आदित्यहृदयं पुण्यं…
अर्थ: यह आदित्यहृदय स्तोत्र पवित्र है, जो सभी शत्रुओं का विनाश करता है, विजय देने वाला, अक्षय और मंगलकारी है।

5

सर्वमंगलमाङ्गल्यं…
अर्थ: यह स्तोत्र सभी मंगल देने वाला, पाप नाशक, चिंता–शोक हरने वाला और आयुष्य बढ़ाने वाला है।


मूल-स्तोत्र (हिंदी अर्थ)

6

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं…
अर्थ: उस सूर्यदेव की पूजा करो, जो उदित होते हैं, जिनको देव–असुर दोनों नमस्कार करते हैं।

7

सर्वदेवात्मको ह्येष…
अर्थ: यह सूर्य सभी देवताओं का आत्मरूप हैं और अपनी किरणों से सब लोकों की रक्षा करते हैं।

8

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च…
अर्थ: सूर्य ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव, स्कंद, प्रजापति, इन्द्र, कुबेर, काल, यम, सोम और जलदेव हैं।

9

पितरो वसवः साध्या…
अर्थ: सूर्य ही पितरों, वसुओं, साध्यों, अश्विनीकुमारों, मनु, वायु, अग्नि, प्रजा एवं प्राण के कर्ता हैं।

10

आदित्यः सविता सूर्यः…
अर्थ: सूर्य का नाम आदित्य, सविता, सूर्य, खग, पूषा, भानु, दिवाकर आदि है।

11

हरिदश्वः सहस्त्रार्चिः…
अर्थ: सूर्य हरित अश्वों के स्वामी, हजार किरणों वाले, अंधकार नाशक और संसार को प्रकाश देने वाले हैं।

12

हिरण्यगर्भः शिशिरः…
अर्थ: सूर्य हिरण्यगर्भ, रवि, अग्निगर्भ, अदिति के पुत्र और शीत नाशक हैं।

13

व्योमनाथस्तमोभेदी…
अर्थ: सूर्य आकाश के स्वामी, अंधकार भेदने वाले, ऋग–यजुर–साम के ज्ञाता और वर्षा कराने वाले हैं।

14

आतपी मण्डली मृत्यु:…
अर्थ: सूर्य ताप देने वाले, मंडलरूप, मृत्यु के दाता, शक्तिशाली और सबका उत्पन्न करने वाले हैं।

15

नक्षत्रग्रहताराणाम…
अर्थ: सूर्य नक्षत्र–ग्रह–तारों के स्वामी हैं और तेजस्वियों में सबसे अधिक तेजस्वी हैं।

16

नमः पूर्वाय गिरये…
अर्थ: पूर्व पर्वत और पश्चिम पर्वत को प्रकाशित करने वाले सूर्य को नमस्कार।

17

जयाय जयभद्राय…
अर्थ: जय देने वाले, शुभता देने वाले, हजार किरणों वाले आदित्य को नमन।

18

नमोऽग्राय वीराय…
अर्थ: वीर, कमल को खिलाने वाले और प्रचण्ड तेज वाले सूर्य को नमस्कार।

19

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय…
अर्थ: ब्रह्मा, ईश, अच्युत, सूर्यरूप देवता को नमस्कार जो सर्वभक्षी और रौद्र रूप भी हैं।

20

तमोघ्नाय हिमघ्नाय…
अर्थ: अंधकार और शीत को नष्ट करने वाले, शत्रु नाशक और ज्योतिष के स्वामी सूर्य को नमस्कार।

21

तप्तचामीकराभाय…
अर्थ: तपते हुए सोने जैसे तेज वाले, विश्वकर्मा रूप, अंधकार नाशक सूर्य को नमन।

22

नाशयत्येष वै भूतं…
अर्थ: सूर्य सभी प्राणियों का नाश, सृजन, पालन, तपन और वर्षा करने वाले हैं।

23

एष सुप्तेषु जागर्ति…
अर्थ: सबके सोने पर सूर्य जाग्रत रहते हैं और यज्ञों का फल भी यही देते हैं।

24

देवाश्च क्रतवश्चैव…
अर्थ: सभी देवता, यज्ञ और उनके फल सूर्य से ही प्राप्त होते हैं।

25

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु…
अर्थ: इस स्तोत्र का स्मरण करने से किसी भी कठिनाई, संकट या भय में मनुष्य नहीं डूबता।

26

पूजयस्वैनमेकाग्रो…
अर्थ: एकाग्रचित्त होकर सूर्य की पूजा करो, इससे युद्ध में विजय निश्चित है।

27

अस्मिन् क्षणे महाबाहो…
अर्थ: अभी इसी क्षण तुम रावण को मार दोगे — ऐसा कहकर अगस्त्य वहीं से चले गए।

28

एतच्छ्रुत्वा महातेजा…
अर्थ: यह सुनकर श्रीराम का शोक नष्ट हुआ और वे अत्यंत प्रसन्न होकर स्तोत्र का जप करने लगे।

29

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं…
अर्थ: सूर्य की ओर देखकर स्तोत्र जपकर श्रीराम ने शक्ति और उत्साह प्राप्त किया।

30

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा…
अर्थ: श्रीराम उत्साहित होकर रावण का वध करने के लिए दृढ़ निश्चय से आगे बढ़े।

31

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य…
अर्थ: सूर्यदेव ने रावण के वध को देखकर प्रसन्नतापूर्वक देवताओं के मध्य कहा – शीघ्र करो!

 

🌞 Aditya Hridaya Stotra — English Meaning (Separate Section)


1

Rama, exhausted from battle, stood worried as he saw Ravana approaching.

2

The gods gathered to watch the battle, and Sage Agastya approached Rama.

3

“O mighty-armed Rama! Listen to this eternal secret by which you will conquer all enemies.”

4

“This sacred Aditya Hridaya Stotra destroys enemies, grants victory, and brings auspiciousness.”

5

“It removes sins, eliminates sorrow and fear, and increases longevity.”


Main Stotra (English Meaning)

6

Worship the rising Sun, adored by gods and asuras, the lord of the universe.

7

The Sun is the soul of all gods and protects all worlds with his rays.

8

The Sun is Brahma, Vishnu, Shiva, Skanda, Indra, Kubera, Time, Yama, Soma and Varuna.

9

He is the lord of the ancestors, Vasus, Sadhyas, Ashwini brothers, Manu, Air, Fire and Life.

10

His names are Aditya, Savita, Surya, Khaga, Bhanu, Divakara and many more.

11

He rides green horses, has thousands of rays and destroys darkness.

12

He is Hiranyagarbha, Ravi, born of Aditi, remover of cold.

13

He is the lord of the sky, destroyer of darkness and the knower of Vedas.

14

He is heat, energy, the cause of creation and destruction.

15

He is the lord of stars, planets and constellations and is the brightest of all.

16

Salutations to the Sun who rises in the east and sets in the west.

17

Salutations to the victorious, auspicious, thousand-rayed Aditya.

18

Salutations to the brave, powerful and lotus-blooming Sun.

19

He is Brahma, Ishana, Achyuta and the radiant devourer of all.

20

He destroys darkness, cold, and enemies; the lord of astrology.

21

He shines like molten gold; the witness of the world.

22

He creates, destroys, nourishes, heats and causes rain.

23

He stays awake when all beings sleep; he gives the fruits of yajnas.

24

He is the lord of all sacrifices, rituals and their results.

25

Whoever remembers him during difficulties never falls.

26

Worship the Sun with concentration; you will win battles.

27

“You will kill Ravana right now” — saying this, Agastya left.

28

Rama became fearless and joyful and chanted the stotra.

29

Gazing at the Sun and chanting, Rama regained strength.

30

Rama moved forward with determination to slay Ravana.

31

The Sun, seeing Rama delighted, told the gods — “It will be done soon!”

 

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⭐ आदित्यहृदय स्तोत्र के चमत्कारिक लाभ

  • मानसिक व शारीरिक ऊर्जा बढ़ाता है

  • आत्मविश्वास, तेज और चमक प्रदान करता है

  • भय, शोक और नकारात्मकता दूर करता है

  • रोग निवारण और आरोग्य की प्राप्ति

  • कार्यों में सफलता और विजय

  • नौकरी-कारोबार में उन्नति

  • ग्रह दोष, विशेषकर सूर्य ग्रह दोष को शांत करता है

  • मन को स्थिर करने वाला श्रेष्ठ स्तोत्र

FAQ (SEO Ready)

Q1. आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

सुबह सूर्योदय के समय या दिन में सूर्य की दिशा में बैठकर करना श्रेष्ठ माना गया है।

Q2. आदित्यहृदय स्तोत्र किसने बताया था?

यह स्तोत्र भगवान अगस्त्य ऋषि ने श्रीराम को युद्धभूमि में बताया था।

Q3. आदित्यहृदय स्तोत्र पढ़ने से क्या लाभ होते हैं?

ऊर्जा, आत्मविश्वास, विजय, आरोग्य, और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

Q4. क्या स्तोत्र का दैनिक पाठ किया जा सकता है?

हाँ, रोज़ या रविवार को विशेष रूप से पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है।

Q5. क्या इसे घर में किसी भी समय पढ़ सकते हैं?

हाँ, परंतु सुबह का समय सर्वोत्तम माना गया है।