पूर्णब्रह्म स्तोत्रम् (Purnabrahma Stotram)
पूर्णब्रह्म स्तोत्रम् एक दिव्य वैदिक स्तुति है जो ब्रह्म, अर्थात् परम सत्य, पूर्ण चेतना और निराकार परमात्मा जगन्नाथस्वामी की महिमा का वर्णन करती है। यह स्तोत्र अद्वैत वेदांत के गूढ़ तत्वों को सरल और भक्तिपूर्ण शैली में प्रस्तुत करता है। इसका पाठ आत्मज्ञान, आंतरिक शांति और मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करता है।
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यह हमें सिखाता है कि ब्रह्म की पूर्णता में से कुछ भी घटाया जाए, वह फिर भी अपरिवर्तनीय और पूर्ण बना रहता है। यही अद्वैत का मूल है।
🌼 पूर्णब्रह्म स्तोत्र 🌼
Shlok + Hindi Meaning + English Meaning
॥ श्लोक १ ॥
🔸 Shlok (Sanskrit)
पूर्णचन्द्रमुखं निलेन्दु रूपम्
उद्भाषितं देवं दिव्यं स्वरूपम् ।
पूर्णं त्वं स्वर्णं त्वं वर्णं त्वं देवम्
पिता माता बंधु त्वमेव सर्वम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥१॥
🔸 हिन्दी अर्थ
आपका मुख पूर्ण चन्द्र की तरह निर्मल और उज्ज्वल है।
आपका दिव्य स्वरूप संसार को प्रकाशित कर रहा है।
आप ही पूर्ण ब्रह्म हैं, आप ही स्वर्ण-सा तेजस्वी रूप हैं।
आप ही मेरे पिता, माता, बंधु—सब कुछ हैं।
हे जगन्नाथ स्वामी! मैं आपको प्रेमपूर्वक प्रणाम करता हूँ।
🔸 English Meaning
Your face shines like the full moon, radiant and pure.
Your divine form illuminates the universe.
You are the complete Brahman, glowing like pure gold.
You are my father, mother, and every relation.
O Lord Jagannath, I bow to You with devotion and love.
॥ श्लोक २ ॥
Shlok
कुंचितकेशं च संचितवेशम्
वर्तुलस्थूलनयनं ममेशम् ।
पिनाकनीनाका नयनकोशम्
आकृष्ट ओष्ठं च उत्कृष्ट श्वासम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥२॥
हिन्दी अर्थ
आपके घुँघराले केश और सुसज्जित रूप अत्यंत मनोहर हैं।
आपकी बड़ी, गोल आँखें करुणा से भरी हैं।
आपकी सुंदर मुस्कान और शांत श्वास मन को मोहित करती है।
हे जगन्नाथ स्वामी! आपको बार-बार प्रणाम।
English Meaning
Your curly hair and adorned appearance are divine.
Your large round eyes overflow with compassion.
Your gentle smile and serene breath enchant the heart.
O Jagannath Swami, I bow to You again and again.
॥ श्लोक ३ ॥
Shlok
नीलाचले चंचलया सहितम्
आदिदेव निश्चलानंदे स्थितम् ।
आनन्दकन्दं विश्वविन्दुचंद्रम्
नंदनन्दनं त्वम् इन्द्रस्य इन्द्रम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥३॥
हिन्दी अर्थ
आप नीलाचल पर्वत पर लक्ष्मीजी के साथ विराजते हैं।
आप आदि देव और अनंत आनंद के स्रोत हैं।
आप विश्व को प्रकाशित करने वाले चंद्र समान हैं।
आप देवों के भी इन्द्र (श्रेष्ठतम) हैं।
हे जगन्नाथ! मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
English Meaning
You reside at Nilachala with Goddess Lakshmi.
You are the primordial God and the source of eternal bliss.
You shine like the moon that illuminates the universe.
You are the Lord of all Lords, the Indra among gods.
O Jagannath, I bow before You.
॥ श्लोक ४ ॥
Shlok
सृष्टि स्थिति प्रलय सर्वमूलम्
सूक्ष्मातिसुक्ष्मं त्वं स्थूलातिस्थूलम् ।
कांतिमयानन्तम् अन्तिमप्रान्तम्
प्रशांतकुन्तलम् ते मूर्त्तिमंतम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥४॥
हिन्दी अर्थ
आप सृष्टि, पालन और प्रलय के मूल कारण हैं।
आप अत्यंत सूक्ष्म भी हैं और अत्यंत विशाल भी।
आप अनंत प्रकाश और परम शांति के स्वरूप हैं।
आपकी दिव्य मूर्ति मन को पूर्ण शांति प्रदान करती है।
हे जगन्नाथ! आपको प्रणाम।
English Meaning
You are the source of creation, preservation, and dissolution.
You are the subtlest of the subtle and the largest of the large.
You are infinite radiance and supreme peace.
Your divine form brings calmness to the soul.
O Jagannath, I bow to You.
॥ श्लोक ५ ॥
Shlok
यज्ञ तप वेद ज्ञानात् अतीतम्
भावप्रेमछंदे सदावशित्वम् ।
शुद्धात् शुद्धं त्वं च पूर्णात् पूर्णम्
कृष्णमेघतुल्यम् अमूल्यवर्णम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥५॥
हिन्दी अर्थ
आप यज्ञ, तप, वेद और ज्ञान से भी परे हैं।
आप भक्ति, प्रेम और भाव के द्वारा ही प्राप्त होते हैं।
आप परम शुद्ध, पूर्ण में भी पूर्ण,
कृष्ण मेघ जैसे घनश्याम और अमूल्य रूप वाले हैं।
हे जगन्नाथ! आपको प्रणाम।
English Meaning
You are beyond rituals, penance, scriptures, and intellectual knowledge.
You can only be attained through devotion and pure love.
You are supremely pure, complete within the complete.
Your dark, cloud-like complexion is priceless.
O Jagannath, I bow to You.
॥ श्लोक ६ ॥
Shlok
विश्वप्रकाशं सर्वक्लेशनाशम्
मन बुद्धि प्राण श्वासप्रश्वासम् ।
मत्स्य कूर्म नृसिंह वामनः त्वम्
वराह राम अनंत अस्तित्वम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥६॥
हिन्दी अर्थ
आप विश्व का प्रकाश हैं और सभी दुखों का नाश करते हैं।
मन-बुद्धि-प्राण और श्वास—सब आपसे ही संचालित होते हैं।
आप मत्स्य, कूर्म, नृसिंह, वामन, वराह, राम—
सभी अवतारों के मूल हैं।
हे अनंत अस्तित्व! आपको प्रणाम।
English Meaning
You are the light of the universe and the destroyer of all suffering.
Mind, intellect, life-force, and breath all arise from You.
You are the essence behind all incarnations—
Matsya, Kurma, Narasimha, Vamana, Varaha, Rama.
O Eternal One, I bow to You.
॥ श्लोक ७ ॥
Shlok
ध्रुवस्य विष्णु त्वं भक्तस्य प्राणम्
राधापति देव हे आर्त्तत्राणम् ।
सर्व ज्ञान सारं लोकाधारम्
भावसंचारम् अभावसंहारम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥७॥
हिन्दी अर्थ
आप ध्रुव के विष्णु हैं, भक्तों के प्राण हैं।
हे राधा-पति! आप दुखियों के रक्षक हैं।
आप समस्त ज्ञान का सार और जगत के आधार हैं।
आप भावना के संचालक और अभाव के संहारक हैं।
हे जगन्नाथ! आपको प्रणाम।
English Meaning
You are the Vishnu of Dhruva, the very life of devotees.
O Lord of Radha, You protect the distressed.
You are the essence of all knowledge and the support of the world.
You spread devotion and remove all negativity.
O Jagannath, I bow to You.
॥ श्लोक ८ ॥
Shlok
बलदेव सुभद्रा पार्श्वे स्थितम्
सुदर्शन संगे नित्य शोभितम् ।
नमामि नमामि सर्वांगे देवम्
हे पूर्णब्रह्म हरि मम सर्वम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥८॥
हिन्दी अर्थ
आप बलराम और सुभद्रा के साथ विराजते हैं।
सुदर्शन चक्र से सदा शोभित रहते हैं।
हे पूर्णब्रह्म! आप मेरे सर्वस्व हैं।
मैं आपके प्रत्येक अंग को प्रणाम करता हूँ।
English Meaning
You stand beside Baladeva and Subhadra.
You are eternally adorned with the Sudarshana Chakra.
O Purnabrahma Hari! You are my everything.
I bow to every part of Your divine form.
॥ श्लोक ९ ॥
Shlok
कृष्णदासहृदि भाव संचारम्
सदा कुरु स्वामी तव किंकरम् ।
तव कृपा बिन्दु हि एक सारम्
अन्यथा हे नाथ सर्व असारम् ।
जगन्नाथ स्वामी भक्तभावप्रेमी नमाम्यहम् ॥९॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रभु! मेरे हृदय में सदैव भक्ति-भाव जागृत करें।
मैं आपका सेवक हूँ—मुझे अपनी सेवा में लगाए रखें।
आपकी एक कृपा-बूँद ही मेरे लिए पर्याप्त है।
आपके बिना सब असार है।
हे जगन्नाथ! मैं आपको प्रणाम करता हूँ।
English Meaning
O Lord! Always fill my heart with devotion.
Keep me forever as Your humble servant.
A single drop of Your grace is enough for me.
Without You, everything is meaningless.
O Jagannath Swami, I bow to You.
इति श्री कृष्णदासः विरचित पूर्णब्रह्म स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥
✔ हिन्दी अर्थ (Hindi Meaning)
“इस प्रकार श्री कृष्णदास द्वारा रचित पूर्णब्रह्म स्तोत्र समाप्त होता है।”
✔ English Meaning
“Thus ends the Purnabrahma Stotram, composed by Shri Krishnadas.”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. पूर्णब्रह्म स्तोत्रम् किस शास्त्र से लिया गया है?
👉 यह स्तोत्र वेदांत एवं उपनिषदों की शिक्षाओं पर आधारित है, विशेषतः अद्वैत तत्वज्ञान से।
Q2. क्या यह स्तोत्र भक्ति और ध्यान दोनों में सहायक है?
👉 हाँ, यह भक्ति और ज्ञान का अद्भुत समन्वय है, जो साधना को पूर्ण बनाता है।
Q3. क्या इसे रोज पढ़ सकते हैं?
👉 अवश्य। यह दैनिक पाठ हेतु उपयुक्त है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
