गंगा अष्टकम् | Ganga Ashtakam
गंगा अष्टकम् गंगा माता की महिमा का स्तोत्र है। इसका नियमित पाठ जीवन में शांति, पुण्य और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। इसे पढ़ें और सुनें।
श्री गंगा अष्टकम् (श्रीकृष्णदास विरचितम्)
(श्लोक एवं हिन्दी भावार्थ)
श्लोक १
सुढ़ंग-अंग-भांगिनि प्रसंग-संग-शोभिते ।
भुजंग-छंद-छन्दिनि भुवना-शोभा-वर्धिते ।
अनंग-भंग-मालिनि विष्णुसेबे-सदारते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ १ ॥
हिंदी अर्थ:
हे गंगा माता! आपके सुंदर अंग और आकर्षक प्रवाह मन को भाते हैं। नाग (भुजंग) की तरह लहराती लहरें आपके प्रवाह को शोभित करती हैं। आप विष्णुजी की चरणधारा हैं और पापों का नाश करने वाली हैं। आपको बार-बार नमन है।
श्लोक २
सुनील-सुढ़ल-जल-नील-अनले-भाषिते ।
प्रचंड-तांडव-शिव-शीरीशाधारा-प्लाबिते ।
संचित-संस्थित-कर्म-भस्म-सर्वस्व-कल्पिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ २ ॥
हिंदी अर्थ:
आपके श्यामल-नीलवर्णी जल की आभा अग्नि के समान चमकती है। शिवजी के जटाओं से आपके प्रचंड प्रवाह का उद्गम हुआ है। आप जीवों के संचित कर्मों को नष्ट कर देती हैं। हे गंगा माता, आप सभी पापों का नाश करने वाली हैं।
श्लोक ३
आनंद-कंद-कंदरे सुनंद-छंद-छन्दिते ।
स्वछंद-छंद-छन्दिनि पपिनाम्-गर्व-खंडिते ।
कल-कल-कल-नादे सकल-ताप-भांजिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ ३ ॥
हिंदी अर्थ:
आप आनंद के स्रोत हैं, और आपके प्रवाह की ध्वनि अत्यंत मधुर है। आपके कलकल नाद से पापियों का अहंकार टूट जाता है। आप संसार के सभी ताप और दुःखों का नाश करने वाली हैं।
श्लोक ४
शंकर-ऋण्ड-मंडिनि विश्व-ब्रह्मांडे-पूजिते ।
हरिपाद्य-तरंगिणि तरंग-अंग-भांगिते ।
सुषमा-शोभा-शोभिनि देव-मुनींद्र-वंदिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ ४ ॥
हिंदी अर्थ:
आप भगवान शंकर की जटाओं में विराजमान होकर सबको पवित्र करने वाली हैं। विष्णु चरणों से उत्पन्न होकर आप समस्त विश्व की शोभा बढ़ाती हैं। देवताओं और मुनियों द्वारा वंदित होकर आप पापों का नाश करती हैं।
श्लोक ५
धगधगधगज्वल प्रज्जल-शिखा-मंडिते ।
पतितानलपावनि अवनि-धरा-विष्मिते ।
महाभैरवनादिनी सुनाद नादे शब्दिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ ५ ॥
हिंदी अर्थ:
आपके प्रवाह की ध्वनि प्रज्ज्वलित अग्नि के समान प्रखर है। आप पतितों को पवित्र करने वाली हैं, और धरती भी आपके प्रवाह को देखकर चकित होती है। आपके गूँजते नाद समस्त दिशाओं में फैलते हैं।
श्लोक ६
हिमाचलसुनंदिनि हिमशिखरेसंस्थिते ।
गिरिमंडलगामिनि विष्णुपादब्जासंभूते ।
शिवसङ्गमदायिनि यमुनासंगमेंस्थिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ ६ ॥
हिंदी अर्थ:
हे गंगा माता! आप हिमालय की पुत्री हैं और वहाँ की शिखरों से प्रवाहित होती हैं। आप विष्णु चरणों से प्रकट हुईं, शिव से संगम कराने वाली हैं और यमुना से भी मिलती हैं। आप पापों का नाश करने वाली हैं।
श्लोक ७
सर्वकामार्थदायिनि सरस्वतीसमायुक्ते ।
त्रिलोकपथगामिनि सिद्धियोगनिसेविते ।
राममिलनदर्शिनि आत्मारामेसदास्थिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ ७ ॥
हिंदी अर्थ:
आप सबकी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं। सरस्वती नदी के साथ आपका संगम होता है। त्रिलोक में आप सबको जोड़ती हैं। सिद्ध और योगीजन आपकी सेवा करते हैं। आप पापों का नाश करती हैं।
श्लोक ८
ब्रह्मरन्ध्रनिवासिनि ब्रह्मरन्ध्रसमुद्भूते ।
उमासपत्नितरूणि मयूरारूढसंभूते ।
महावैष्णवीरूद्राणि रुद्रमंडलमंडिते ।
सर्व-कल्मश-नाशिनि हर-हर-गंगामाते ॥ ८ ॥
हिंदी अर्थ:
आप ब्रह्मरन्ध्र (शिवजटा) में निवास करने वाली और वहीं से प्रकट हुई हैं। आप उमादेवी के साथ शोभित हैं और मयूरवाहिनी के रूप में भी देखी जाती हैं। आप महावैष्णवी शक्ति और रुद्रों से अलंकृत हैं।
श्लोक ९ (फलश्रुति)
कलाकलाधरधरा कलाधरअलंकृते ।
तापत्रयविनाशिनि विरिंचिकलसेस्थिते ।
वेदवदान्यामेदिनी भेदिनीधराझंकृते ।
परमेश्वरी जननि श्रीकृष्णदासस्यमाते ॥ ९ ॥
हिंदी अर्थ:
आप चन्द्रमा का आभूषण धारण करती हैं। तीनों प्रकार के तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) का नाश करती हैं। ब्रह्मा के कलश में स्थित होकर आप वेदों में वंदित हैं। हे परमेश्वरी जननी! आप सबका उद्धार करने वाली हैं।
फलश्रुति
।। इति श्रीकृष्णदासः विराचित गंगा अष्टकम् संपूर्णम् ।।
हिंदी अर्थ:
इस गंगा अष्टक का जो भी भक्तिपूर्वक पाठ करता है, उसे गंगा माता के कृपा से समस्त पापों का नाश होकर पुण्य की प्राप्ति होती है।
🌊 निष्कर्ष:
गंगा अष्टकम् गंगा माता की महिमा का वर्णन करता है और यह बताता है कि उनका स्मरण करने से सभी पाप और दुःख नष्ट हो जाते हैं।
FAQ (Frequently Asked Questions)
Q: गंगा अष्टकम् क्या है?
A: गंगा अष्टकम् गंगा माता की महिमा का स्तोत्र है, जिसमें उनके पवित्र स्वरूप और पुण्य की स्तुति की गई है।Q: इसे कैसे पढ़ें या सुनें?
A: इसे भक्तिभाव से पढ़ें या सुनें। नियमित पाठ से पुण्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।Q: गंगा अष्टकम् का लाभ क्या है?
A: जीवन में शांति, पुण्य, आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक संतुलन मिलता है।Q: गंगा अष्टकम् किस ग्रंथ से लिया गया है?
A: यह मुख्यतः भक्ति और पूजा ग्रंथों में प्रचलित है।
