सत्यनारायण स्तुति | Satyanarayana Stuti

सत्यनारायण स्तुति भगवान सत्यनारायण की महिमा और कृपा का वर्णन करती है। यह पाठ पूजा, व्रत और विशेष अवसरों पर किया जाता है। यहां आपको इसका संपूर्ण पाठ, अर्थ, और ऑडियो मिलेगा।

सत्यनारायण स्तुति — श्लोक एवं भावार्थ


(1)
ध्यायेत् सत्यं गुणातीतं गुणत्रय-समन्वितम् ।
लोकनाथं त्रिलोकेशं कौस्तुभाभरणं हरिम् ॥

भावार्थ:
म भगवान सत्यनारायण का ध्यान करें, जो सभी गुणों से परे हैं, फिर भी सत्व, रज और तम — इन तीनों गुणों से युक्त हैं। वे सम्पूर्ण लोकों के स्वामी, तीनों लोकों के ईश्वर, कौस्तुभ मणि से विभूषित भगवान हरि हैं।


(2)
नीलवर्णं पीतवस्त्रं श्रीवत्सपदभूषितम् ।
गोविन्दं गोकुलानन्दं ब्रह्माद्यैरपि पूजितम् ॥

भावार्थ:
वे नील वर्ण (श्याम) के हैं, पीत वस्त्र धारण करते हैं, वक्षस्थल पर श्रीवत्स चिन्ह से सुशोभित हैं। वे गोविंद हैं, गोकुल के आनंददाता हैं और ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा पूजित हैं।


(3)
सत्यनारायणं देवं वन्देऽहं कामदं प्रभुम् ।
लीलया विततं विश्वं येन तस्मै नमो नमः ॥

भावार्थ:
मैं भगवान सत्यनारायण को नमस्कार करता हूँ, जो भक्तों की सभी कामनाएँ पूर्ण करने वाले, सर्वश्रेष्ठ प्रभु हैं। जिनके लीलामय इच्छाशक्ति से यह सम्पूर्ण जगत व्याप्त है, उन परमेश्वर को बारंबार प्रणाम है।


समापन पंक्ति:
इति सत्यनारायणस्तुतिः
अर्थ — इस प्रकार सत्यनारायण स्तुति पूर्ण होती है।

FAQ Section

Q1. सत्यनारायण स्तुति कब पढ़नी चाहिए?
A1. यह स्तुति पूर्णिमा, व्रत दिवस या किसी भी शुभ अवसर पर भगवान सत्यनारायण की पूजा के समय पढ़ी जाती है।

Q2. क्या सत्यनारायण स्तुति का पाठ रोज़ किया जा सकता है?
A2. हां, इसे रोज़ पढ़ने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन में स्थिरता आती है।

Q3. Satyanarayana Stuti is from which scripture?
A3. It is part of devotional prayers offered to Lord Vishnu, especially during Satyanarayan Vrat Katha, mentioned in Skanda Purana.

Q4. Can I listen to Satyanarayana Stuti online?
A4. Yes, you can listen to the audio version and also download the PDF for free from our website.